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भोपाल-इंदौर समेत 16 नगर निगमों में बने शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, 24 घंटे काम करेगा इमरजेंसी सेंटर

भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रतलाम, रीवा, कटनी, सतना, सिंगरौली, बुरहानपुर, खंडवा, सागर, देवास, मुरैना और छिंदवाड़ा में आपदा से निपटने के लिए विकेंद्रीकृत ढांचा तैयार होगा।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 09:43:42 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 09:43:42 PM (IST)
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भोपाल-इंदौर समेत 16 नगर निगमों में बने शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, 24 घंटे काम करेगा इमरजेंसी सेंटर
मध्य प्रदेश के 16 नगर निगमों में स्थापित होंगे सचिवालय।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश के 16 नगर निगमों में स्थापित होंगे सचिवालय
  2. भोपाल-इंदौर समेत 16 शहरों में तैयार होगी कार्ययोजना
  3. नगर निगम आयुक्त होंगे अध्यक्ष और कलेक्टर उपाध्यक्ष

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में 'शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (यूडीएमए) गठित किए गए हैं। इसके तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रतलाम, रीवा, कटनी, सतना, सिंगरौली, बुरहानपुर, खंडवा, सागर, देवास, मुरैना और छिंदवाड़ा में आपदा से निपटने के लिए विकेंद्रीकृत ढांचा तैयार होगा। गृह विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है।

30 दिन में बनेगा सचिवालय, चौबीसों घंटे काम करेगा ईओसी

30 दिन के अंदर हर नगर निगम को कार्यालय परिसर में प्राधिकरण का अलग सचिवालय स्थापित करना होगा, जहां चौबीसों घंटे (24x7) काम करने वाला नगर आपातकालीन संचालन केंद्र (ईओसी) बनाया जाएगा। आपात स्थिति में यह केंद्र जिला और राज्य कमांड सेंटर एवं वल्लभ भवन सिचुएशन रूम से सीधे तालमेल करेगा। अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त स्तर का अधिकारी सचिवालय का सीईओ होगा।


60 दिन में रूपरेखा, 90 दिन में सौंपनी होगी कार्य योजना

सचिवालय के संचालन और जिम्मेदारियों के क्रियान्वयन की रूपरेखा 60 दिन में तैयार करनी होगी। विस्तृत कार्य योजना 90 दिनों में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपनी होगी। नगर निगमों के लिए यह प्राधिकरण पहली बार गठित किया गया है। फिलहाल गृह विभाग के अधीन राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण काम कर रहा है।

सरकारी विभागों के संसाधन अधिग्रहित कर सकेगा प्राधिकरण

प्राधिकरण अपने शहर के लिए शहरी आपदा प्रबंधन योजना बनाएगा, जिसे राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) से मंजूरी लेनी होगी। हर दो साल में कम से कम एक बार योजना की समीक्षा और अद्यतन करना अनिवार्य होगा। समय-समय पर माक ड्रिल भी होंगी। प्राधिकरण राहत कार्यों के लिए सरकारी विभागों के संसाधन अधिग्रहित कर उन्हें निर्देशित कर सकेगा।

प्रभावित क्षेत्रों में वाहनों और आम लोगों की आवाजाही नियंत्रित या प्रतिबंधित की जा सकेगी। उसे मलबा हटाने, खोजबीन, अस्थायी पुल बनाने और जनसुरक्षा के लिए खतरनाक ढांचे गिराने का अधिकार होगा। प्रभावितों के लिए भोजन, आश्रय, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

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प्राधिकरण में नगर निगम आयुक्त अध्यक्ष और कलेक्टर उपाध्यक्ष होंगे

प्राधिकरण का अध्यक्ष संबंधित नगर निगम का पदेन आयुक्त और उपाध्यक्ष कलेक्टर होगा। वहीं, भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त एवं अन्य 14 नगर निगमों में संबंधित आइजी सदस्य होंगे।

संभागीय कमांडेंट होमगार्ड्स/एसडीईआरएफ, मुख्य नगर नियोजक, महापौर द्वारा नामांकित दो वार्ड पार्षद, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी और नगर निगम के अपर आयुक्त (प्रभारी, आपदा प्रबंधन) भी सदस्य होंगे। पीडब्ल्यूडी, पीएचई और एमपीइबी के मुख्य अभियंता, नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नगर निगम अध्यक्ष द्वारा नामित आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे।

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