MP में 1 अक्टूबर से राशन दुकानों पर तालेबंदी की चेतावनी; कमीशन 90 से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
पीडीएस दुकानदारों ने कमीशन नहीं बढ़ाए जाने पर अक्टूबर माह का राशन वितरित नहीं करने की चेतावनी दी है।
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 09:18:44 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 09:18:44 PM (IST)
एमपी राशन विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को ज्ञापन दिया - नईदुनियाHighLights
- 1 अक्टूबर से राशन वितरण बंद करने का अल्टीमेटम
- कमीशन 90 से 200 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन की मांग
- त्योहारों से पहले राशन वितरण पर असर की आशंका
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। पीडीएस दुकानदारों ने कमीशन बढ़ाने और जुलाई-अगस्त का बकाया कमीशन भुगतान करने की मांग को लेकर 1 अक्टूबर से राशन वितरण बंद करने का अल्टीमेटम दिया है। दुकानदारों के इस ऐलान से 3 अक्टूबर से शुरू होने वाले अक्टूबर माह के राशन वितरण पर संकट के आसार बन गए हैं।
हालांकि खाद्य विभाग ने सभी पीडीएस दुकानों पर अक्टूबर का राशन कोटा पहुंचा दिया है।
कमीशन बढ़ाने की मांग
सोमवार को एमपी राशन विक्रेता संघ ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपे। भोपाल में संघ पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को ज्ञापन दिया।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में शहरी क्षेत्र में पीडीएस दुकानदारों को 90 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है, जबकि वे इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।
दूसरे राज्यों में ज्यादा कमीशन का हवाला
उनका दावा है कि बिहार, केरल, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में दुकानदारों को 200 रुपये या उससे अधिक कमीशन मिलता है।
संघ की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य राशिद खान और विक्की शर्मा ने बताया कि एक अक्टूबर तक जुलाई-अगस्त का लंबित कमीशन जारी करने और कमीशन बढ़ाने की मांग की गई है। मांग पूरी नहीं होने पर अक्टूबर का राशन वितरित नहीं करने की चेतावनी दी गई है।
इससे त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं को राशन मिलने में परेशानी बढ़ सकती है।
खुद के खर्च से चलाना पड़ रहा दुकान
राशन विक्रेताओं के अनुसार कमीशन में दुकान का किराया, सेल्समैन और तुलाई करने वाले कर्मचारी का भुगतान समेत अन्य खर्च पूरे करने पड़ते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा कमीशन में खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है और कई दुकानदारों को अपनी जेब से राशि लगाकर दुकानें संचालित करनी पड़ रही हैं।