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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रविवार का दिन, छुट्टी का माहौल और कड़ाके की ठंड... लोग देर तक सोने और घर के पेंडिंग काम निपटाने की तैयारी में थे, लेकिन कोलार की करीब 3 लाख आबादी के लिए यह रविवार किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। बिजली कंपनी के मेंटेनेंस के नाम पर लिए गए शटडाउन ने केरवा डैम के फिल्टर प्लांट की कार्यप्रणाली को रोक दिया, जिसके चलते शाम होते-होते आधे से ज्यादा कोलार में जल-हाहाकार मच गया। बिजली कंपनी ने सुबह 10 से शाम 4 बजे तक एचटी फीडर लाइन का काम किया। हालांकि इसकी सूचना पहले दी गई थी, लेकिन सवाल नगर निगम के जल कार्य विभाग पर उठता है, जिनके पास 3 लाख लोगों के लिए कोई बैकअप प्लान नहीं था।
कोलार की यह स्थिति बताती है कि करोड़ों के इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद, भोपाल का एक बड़ा हिस्सा आज भी एक शटडाउन की दूरी पर प्यासा रहने को मजबूर है। राजधानी में पारा गिर रहा है, लेकिन पानी की किल्लत ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। सर्वधर्म, दानिश कुंज और राजहर्ष जैसी पॉश कॉलोनियों के लोग हाथ कंपा देने वाली ठंड में खाली बाल्टियाँ और डिब्बे लेकर पानी की तलाश में भटकते देखे गए। रविवार को कपड़े धोने और घर की सफाई के लिए पानी का कोटा बचाकर रखने वाली महिलाओं का पूरा गणित बिगड़ गया।
दमखेड़ा, अमरनाथ कॉलोनी, महाबली नगर और साईंनाथ नगर जैसे इलाकों में लोग शाम को सड़कों पर नजर आए। प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि सप्लाई बाधित होने पर टैंकर भेजे जाएंगे, लेकिन जमीनी हकीकत यह थी कि लोग घंटों इंतजार करते रहे और टैंकरों का कहीं अता-पता नहीं था। मजबूरन लोगों को बोतलबंद पानी खरीदकर काम चलाना पड़ा। वहीं कोलार की बड़ी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स में स्थिति और भी खराब थी; बिजली गुल होने से मोटर नहीं चली और शाम तक ओवरहेड टैंक पूरी तरह सूख गए। लिफ्ट तो चल रही थी, लेकिन नलों में पानी के बजाय केवल हवा निकल रही थी।
सर्वधर्म और शिर्डीपुरम की मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स के नागरिक सबसे ज्यादा परेशान हुए। नगर निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि बिजली कंपनी के मेंटेनेंस के कारण फिल्टर प्लांट बंद था। सुबह की सप्लाई तो की गई थी, लेकिन शाम को फीडर बंद होने से परेशानी हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सोमवार सुबह से पानी की सप्लाई पूरी तरह सुचारू कर दी जाएगी।
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