जलक्रीड़ा और मछलियों का शिकार करने 5 हजार किमी दूर से भोपाल पहुंचा विदेशी मेहमान 'व्हिस्कर्ड टर्न'
कड़ाके की ठंड की शुरुआत के साथ ही भोपाल की झीलें एक बार फिर सात समंदर पार से आए प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुलजार हो गई हैं। यूरोप, चीन और मध्य एशिया ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 10:05:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 10:05:04 PM (IST)
व्हिस्कर्ड टर्नमोहम्मद अबरार खान, नईदुनिया, भोपाल। कड़ाके की ठंड की शुरुआत के साथ ही भोपाल की झीलें एक बार फिर सात समंदर पार से आए प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुलजार हो गई हैं। यूरोप, चीन और मध्य एशिया से लगभग पांच किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा तय कर ''व्हिस्कर्ड टर्न'' राजधानी पहुंच चुके हैं। रविवार को मोतिया तालाब में इन पक्षियों को झुंड के रूप में जलक्रीड़ा करते और छोटी मछलियों का शिकार करते देखा गया।
मूंछ जैसी रेखा है इसकी विशेष पहचान
व्हिस्कर्ड टर्न मुख्य रूप से झीलों, तालाबों और दलदली क्षेत्रों (वेटलैंड्स) में रहना पसंद करता है। भोपाल के जल निकाय इनके लिए सबसे अनुकूल स्थल साबित हो रहे हैं। पतले नुकीले पंख, अत्यंत फुर्तीली उड़ान और चोंच के पास मूंछ जैसी दिखने वाली सफेद रेखा इसकी प्रमुख पहचान है, जिसके कारण इसे ''व्हिस्कर्ड'' नाम दिया गया है। यह पक्षी उड़ते हुए पानी की सतह से पलक झपकते ही जलीय कीट और मछलियां पकड़ने में माहिर है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, भोपाल जैसे जल-समृद्ध शहरों में इन प्रवासी पक्षियों का समय पर आगमन पर्यावरण की अच्छी सेहत का प्रतीक है। प्रकृति के पारिस्थितिक तंत्र ( के संतुलन में इस पक्षी की अहम भूमिका है।
विदेशी मेहमानों की संख्या और बढ़ेगी!
हालांकि, वर्तमान में इसकी संरक्षण स्थिति ''कम खतरे'' वाली श्रेणी में है, लेकिन झीलों में बढ़ता प्रदूषण और सिमटते वेटलैंड्स इनके प्राकृतिक आवास के लिए भविष्य में संकट पैदा कर सकते हैं। शहर के मोतिया तालाब, छोटा तालाब और बड़ा तालाब (भोजताल) में यह पक्षी आगामी मार्च माह तक प्रवास करेंगे। जानकारों का कहना है कि यदि जलाशयों का संरक्षण और उनकी स्वच्छता बरकरार रखी जाए, तो आने वाले वर्षों में इन विदेशी मेहमानों की संख्या और भी बढ़ सकती है।
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