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भागीरथपुरा कांड के बाद शुरू हुई 'जल सुनवाई' पर ब्रेक, शुरुआती मुस्तैदी के बाद अफसरों ने ठंडे बस्ते में डाली योजना

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड के बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में जल सुनवाई शुरू की थी। इसके तहत सभी जिला मुख्यालयों, नगरीय निकाय कार्यालयों से लेकर ज...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 07:12:06 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 07:14:13 PM (IST)
भागीरथपुरा कांड के बाद शुरू हुई 'जल सुनवाई' पर ब्रेक, शुरुआती मुस्तैदी के बाद अफसरों ने ठंडे बस्ते में डाली योजना
इंदौर के भागीरथपुरा मामले के बाद प्रदेश में शुरू की गई जल सुनवाई बंद (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. इंदौर के भागीरथपुरा मामले के बाद प्रदेश में शुरू की गई जल सुनवाई बंद
  2. कई जिलों में आसन्न जल संकट के चलते इसका महत्व बढ़ा
  3. शुरुआती मुस्तैदी के बाद अफसरों ने ठंडे बस्ते में डाली योजना

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड के बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में जल सुनवाई शुरू की थी। इसके तहत सभी जिला मुख्यालयों, नगरीय निकाय कार्यालयों से लेकर जोन तक पर जल सुनवाई को अनिवार्य किया गया था। उद्देश्य था दूषित जल के संबंध में मिलने वाली शिकायतें तुरंत सुनी जाएं और उनका त्वरित निराकरण भी हो। शुरुआती दो माह तक इसकी व्यवस्था अच्छी रही।

अधिकारी जोन या कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते भी थे लेकिन बाद में इसमें ढिलाई शुरू हुई। अब लगभग पूरे प्रदेश में जल सुनवाई का आयोजन बंद कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश स्तर पर शुरू किए गए स्वच्छ जल अभियान के तहत हर मंगलवार को जल सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया गया था।


इस पहल का मुख्य उद्देश्य था कि आम जनता सीधे नगरीय निकायों, कलेक्टर कार्यालय और ग्राम पंचायतों में बैठकर पानी से जुड़ी समस्याओं का तुरंत निपटारा करवा सके।

मंत्रियों और बड़े अधिकारियों ने खुद संभाली कमान

शुरुआत में मंत्रियों और बड़े अधिकारियों ने खुद कमान संभाली। रीवा से लेकर भोपाल और इंदौर तक शिविर लगाए गए, जिससे जनता में एक उम्मीद जागी थी लेकिन अब जल सुनवाई लगभग बंद हो गई है। बता दें, प्रदेश में जून में नगरीय निकायों में कुल 29,682 जल लीकेज चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 30,961 लीकेजों का सुधार एवं मरम्मत की गई। 1,03,042 जल नमूनों का परीक्षण किया गया।

यह भी पढ़ें- इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई कई मौतों के जिम्मेदार अधिकारी को बनाया कलेक्टर, कांग्रेस ने किया विरोध

516 प्रदूषित नमूनों को सुधारा गया। लेकिन इसके बाद से अब तक राज्य स्तर पर की गई कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं आई है। वर्तमान में राज्य के 11 प्रमुख जिले जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, अलीराजपुर और झाबुआ इस वर्ष कम वर्षा के कारण जल संकट की कगार पर हैं। ऐसे समय में अब जल सुनवाई का महत्व और बढ़ गया है।