• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

एमपी में अगले साल से लागू होगी मौसम आधारित फसल बीमा योजना, टमाटर-मिर्च से लेकर केला-पपीता तक का होगा बीमा

मध्य प्रदेश में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अगले साल से लागू होगी। इसके लिए आवश्यक मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम परियोजना के टेंडर कृषि व...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 01:56:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 01:56:42 PM (IST)
एमपी में अगले साल से लागू होगी मौसम आधारित फसल बीमा योजना, टमाटर-मिर्च से लेकर केला-पपीता तक का होगा बीमा
एमपी में अगले साल से लागू होगी मौसम आधारित फसल बीमा योजना (AI तस्वीर)

HighLights

  1. प्रदेश में अगले साल से लागू होगी मौसम आधारित फसल बीमा योजना
  2. मौसम के बिगड़े मिजाज से अब नहीं होगा किसानों को नुकसान
  3. बिना आवेदन सीधे खाते में पहुंचेगा मौसम आधारित फसल बीमा का क्लेम

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अगले साल से लागू होगी। इसके लिए आवश्यक मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम परियोजना के टेंडर कृषि विभाग ने जारी कर दिए हैं। योजना लागू होने से टमाटर, बैंगन, मिर्च, अदरक, केला, पपीता, अमरूद आदि फसलों को सुरक्षा कवच मिलेगा। अभी बीमा नहीं होने से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सरकार राजस्व परिपत्र पुस्तक के प्रविधान के अनुसार राहत राशि देती है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले सप्ताह सवाल उठाते हुए किसान हित में इसे शीघ्र लागू करने की बात कही थी। प्रदेश की ओर से बताया गया था कि योजना के लिए बिना मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम के लागू नहीं हो सकती है। इसके लिए टेंडर किए जा चुके हैं। पहली बार में कंपनियां नहीं आईं, इसलिए दोबारा टेंडर किए गए हैं।


मौसम आधारित फसल बीमा योजना में वास्तविक उपज के नुकसान के बजाय वर्षा, तापमान, हवा की गति और आर्द्रता जैसे मौसम के आंकड़ों को आधार बनाया जाता है। जबकि अभी नुकसान होने पर बिना किसी सर्वे के किसानों के खाते में मुआवजा भेज दिया जाता है।

किसानों को बीमा दावा प्राप्त करने के लिए अलग से आवेदन या सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती है। कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव का कहना है कि बीमा योजना के लिए प्रक्रिया चल रही है। नई योजना के लिए मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा सिस्टम जरूरी है, टेंडर कर दिए हैं। जल्द प्रक्रिया पूरी करके योजना को लागू किया जाएगा।

इन स्थितियों में मिलता है सुरक्षा कवच

सूखा, अल्पवृष्टि, अतिवृष्टि, बाढ़, जलभराव, भूस्खलन, चक्रवात, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली, प्राकृतिक आग सहित विभिन्न प्राकृतिक जोखिमों की स्थिति में फसल को सुरक्षा कवच बीमा से मिलता है। कटाई के बाद खेत में रखी उपज को भी निर्धारित अवधि तक संरक्षण दिया जाता है।

यह भी पढ़ें- MP में खाद वितरण पर से रोक हटी : 82 लाख किसानों का इंतजार खत्म,17 अगस्त से दोबारा शुरू होगी बिक्री

बीमित राशि का पांच प्रतिशत तक है प्रीमियम

किसानों को बीमित राशि का अधिकतम पांच प्रतिशत अथवा वास्तविक प्रीमियम जो भी कम हो अंश के रूप में जमा करना होगा। अऋणी किसान के लिए फसल लगाने का स्वघोषित प्रमाण पत्र, नक्शा खसरा, आधार कार्ड, आइएफएससी कोड सहित अन्य आवश्यक जानकारी उल्लेखित बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति देनी होती है।