• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

Weather Forecast Explainer: बारिश होगी या नहीं? जानें मौसम विभाग कैसे करता है पूर्वानुमान

Weather Forecast Explainer: क्या आपने कभी सोचा है कि मौसम विभाग (IMD) कैसे बताता है कि कल बारिश होगी या लू चलेगी? आखिर वो कौन-सी तकनीकें हैं, जिनसे मौ...और पढ़ें

By ADITYA KUMAREdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 03 Nov 2025 06:11:42 PM (IST)Updated Date: Mon, 03 Nov 2025 10:17:29 PM (IST)
Weather Forecast Explainer: बारिश होगी या नहीं? जानें मौसम विभाग कैसे करता है पूर्वानुमान
Weather Forecast Explainer: जानें मौसम विभाग कैसे करता है पूर्वानुमान

डिजिटल डेस्क। 'अगले दो दिनों तक MP में होगी बारिश, IMD ने जारी किया अलर्ट...' अगर आप खबरों के प्रति जागरूक है तो इससे मिलती-जुलती हेडलाइन आपके स्क्रीन पर भी आया होगा। मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि मौसम विभाग (IMD) कैसे बताता है कि कल बारिश होगी या लू चलेगी? आखिर वो कौन-सी तकनीकें हैं, जिनसे मौसम वैज्ञानिक इतनी दूर की भविष्यवाणी कर लेते हैं? आइए जानते हैं कि मौसम का पूर्वानुमान यानी Weather Forecast कैसे तैयार होता है।

मौसम पूर्वानुमान क्या है?

मौसम पूर्वानुमान विज्ञान की एक शाखा है जिसमें किसी जगह की वायुमंडलीय स्थिति का वैज्ञानिक ढंग से अनुमान लगाया जाता है। यानी मौसम वैज्ञानिक यह पता लगाते हैं कि आने वाले समय में हवा, तापमान, नमी और बारिश जैसी परिस्थितियां कैसी रहेंगी।


पहले के समय में लोग आकाश देखकर या बैरोमीटर जैसे साधनों से मौसम का अनुमान लगाते थे। लेकिन अब यह काम पूरी तरह से आधुनिक कंप्यूटर, उपग्रहों और रडार की मदद से किया जाता है।

आधुनिक तकनीक से कैसे होता है पूर्वानुमान?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) हर दिन देशभर के हजारों स्थानों से हवा, नमी, तापमान और दबाव से जुड़ा डेटा इकट्ठा करता है। ये आंकड़े जमीन के स्टेशनों, समुद्र के बुआ, हवाई गुब्बारों और उपग्रहों से मिलते हैं। इस विषय पर पूरी जानकारी मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने दी।

naidunia_image

1. उपग्रह (Satellites): आसमान से तस्वीरें लेकर बादलों की स्थिति, हवा की दिशा और तापमान का पता लगाते हैं।

2. डॉप्लर रडार (Doppler Radar): हवा की गति और दिशा मापने में मदद करता है। इससे तूफानों, चक्रवातों और भारी बारिश की जानकारी पहले ही मिल जाती है।

3. सुपर कंप्यूटर (Supercomputers): ये मशीनें वायुमंडल के जटिल गणितीय मॉडलों पर काम करती हैं और लाखों गणनाओं के आधार पर मौसम का अनुमान लगाती हैं।

चक्रवात और तूफानों की सटीक भविष्यवाणी

पिछले कुछ सालों में भारत ने मौसम पूर्वानुमान में बड़ी सफलता हासिल की है। जैसे - ओडिशा और आंध्रप्रदेश का फाइलिन चक्रवात, हुदहुद, निलोफर या ओखी तूफान - इन सभी की जानकारी मौसम विभाग ने पहले ही दे दी थी।

इससे लाखों लोगों की जानें बचीं और संपत्ति का नुकसान भी काफी कम हुआ।

कितने दिनों के लिए किया जाता है पूर्वानुमान?

मौसम विभाग तीन तरह के पूर्वानुमान जारी करता है -

  • कम अवधि (Short-range): अगले 24 से 48 घंटे का मौसम।
  • मध्यम अवधि (Medium-range): 3 से 10 दिनों के भीतर का अनुमान।
  • दीर्घ अवधि (Long-range): महीनों तक के रुझान, जैसे कि “इस बार मानसून सामान्य रहेगा या नहीं।”

मध्यम अवधि के पूर्वानुमान सबसे कठिन होते हैं क्योंकि इनमें कई मौसमीय घटनाओं का असर जोड़कर गणना करनी पड़ती है।

‘समष्टि पूर्वानुमान’ कैसे बढ़ाता है सटीकता

आजकल मौसम विभाग “समष्टि पूर्वानुमान” (Ensemble Forecast) तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसमें एक ही परिस्थिति के कई अलग-अलग गणितीय मॉडल चलाए जाते हैं।

अगर ज्यादातर मॉडल एक जैसी भविष्यवाणी दें, तो विभाग को भरोसा होता है कि पूर्वानुमान सटीक है।

मानसून का पूर्वानुमान क्यों जरूरी है?

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का अनुमान सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए वैज्ञानिक समुद्री तापमान, हवा की दिशा, जेट स्ट्रीम और एल-नीनो जैसे कारकों का अध्ययन करते हैं। हालांकि, मौसम एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए कभी-कभी पूर्वानुमान में थोड़ी चूक भी हो जाती है।

इसे भी पढ़ें... Winter Tourist Place: MP की ये 6 लोकेशन ठंड में लोगों की पहली पसंद, उमड़ते हैं हजारों टूरिस्ट