
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल रेल मंडल की ट्रेनों के संचालन को और अधिक तेज, सुचारु और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। रानी कमलापति (आरकेएमपी) रेलवे स्टेशन पर अत्याधुनिक व्हील टर्निंग मशीन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। करीब 10.72 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस मशीन का 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो गया है। कनेक्टिविटी पूरी होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके शुरू होने से भोपाल से चलने और गुजरने वाली ट्रेनों के व्हील मेंटेनेंस में लगने वाला समय और संसाधन दोनों काफी हद तक कम हो जाएंगे। यह सुविधा यात्रियों के लिए भी राहत लेकर आएगी, क्योंकि ट्रेनों की उपलब्धता और समय पालन बेहतर होगा।
अब तक ट्रेनों के पहियों के मेंटेनेंस के लिए कोचों को निशातपुरा वर्कशाप भेजना पड़ता था, जहां इस प्रक्रिया में करीब 7 दिन का समय लग जाता था। कई बार समय पर मेंटेनेंस न होने से ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ता था। नई व्हील टर्निंग मशीन के शुरू होने के बाद यह पूरा काम आरकेएमपी स्टेशन पर ही हो सकेगा। खास बात यह है कि यह पूरी तरह आटोमेटिक मशीन है, जिससे जहां पहले एक हफ्ता लगता था, वहीं अब महज 3 घंटे में व्हील मेंटेनेंस संभव होगा। इससे ट्रेन टर्नअराउंड टाइम घटेगा और संचालन कहीं अधिक सुचारु बन सकेगा।
रेलवे शेड्यूल के अनुसार इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) कोचों का व्हील मेंटेनेंस हर नो महीने में किया जाता है, जबकि लिंके हाफमैन बुश (एलएचबी) और वंदे भारत कोचों में यह अवधि 18 महीने की होती है। ऐसे में भोपाल जैसे व्यस्त रेल मंडल के लिए यह मशीन बेहद अहम साबित होगी। हालांकि फिलहाल एक तकनीकी अड़चन सामने आई है। मशीन बनकर तैयार है, लेकिन उसे जोड़ने वाला ट्रैक अभी तैयार नहीं हो पाया है, जिसके कारण मशीन तक कनेक्टिविटी नहीं मिल सकी है और संचालन शुरू नहीं हो सका है।
मशीन पूरी तरह तैयार है और ट्रैक निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि फरवरी तक ट्रैक बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद व्हील टर्निंग मशीन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद अधिकांश ट्रेनों का व्हील मेंटेनेंस आरकेएमपी स्टेशन पर ही किया जाएगा। यह सुविधा न सिर्फ भोपाल रेल मंडल को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि यात्रियों को भी समय पर और सुरक्षित ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर यह भोपाल की रेल व्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।- शिवम त्रिवेदी, कोचिंग डिपो ऑफिसर