
भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि), Bhopal news। मैं शहर में ऑटो चलाने का काम करती थी। देश में कोरोना की दस्तक के बाद मार्च में देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने पर तमाम गतिविधियां ठप पड़ गईं, जिससे मेरा ऑटो चलाना भी बंद हो गया। आमदनी का और कोई जरिया नहीं था। घर में खाने-पीने के लाले पड़ने लगे। मैं बेहद निराश हो गई। कुछ सूझ नहीं रहा था कि अब क्या करूंगी। इस दौरान कई ऐसे लोग भी मिले जो दाने-दाने के लिए मोहताज हो रहे थे। मुझे खुशी है कि 'गौरवी' केंद्र की तरफ से ऐसे लोगों को राशन बांटने को कहा गया तो हम इस काम में जुट गए। इसके बाद तो अपनी तकलीफ और दर्द भूल गए। यह बात घरेलू हिंसा से पीड़ित एक महिला ने 'गौरवी' केंद्र द्वारा आयोजित 'बोल के लब आजाद हैं तेरे"कार्यकम में कही।
बुधवार को भोपाल में सिंधु भवन में आयोजित कार्यक्रम में 'गौरवी' की तरफ से ऐसी कुछ महिलाओं को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने अपनी तकलीफें भूल लॉकडाउन में दूसरों की मदद की। इस दौरान मंच पर कुछ महिलाएं अपने ऊपर हुई घरेलू हिंसा की बात बताते हुए भावुक हो उठीं और उनकी आंखों से आंसू छलक आए।
'गौरवी' के संचालन में सहयोग करने वाली संस्था 'एक्शन एड' की डायरेक्टर पॉलिसी एंड कम्युनिकेशन सारिका सिन्हा ने इस अवसर पर बताया कि लॉकडाउन के दौरान 'गौरवी' की तरफ से सात हजार लोगों को मदद पहुंचाई गई। कार्यक्रम में आइजी, महिला अपराध दीपिका सूरी और संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग स्वाति मीणा भी मौजूद थीं।