
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में एचआइवी-एड्स के विरुद्ध चल रही लड़ाई के बीच संक्रमण के आंकड़ों और खासकर युवाओं में जोखिम की दर ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य में इस वक्त 48,487 एचआइवी संक्रमित मरीज लगातार एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) की जीवनरक्षक दवा पर हैं, जिनका उपचार 34 विशेष एआरटी केंद्रों से किया जा रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि राज्य में दर्ज संक्रमण के कुल मामलों में से 40 प्रतिशत केस 15 से 35 वर्ष के लोग हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 17,000 से अधिक नए मरीज पंजीकृत हुए हैं। यानी हर साल 6,000 से 7,000 के बीच नए मरीज सामने आ रहे हैं। अकेले भोपाल शहर में साढ़े सात हजार मरीज छह एआरटी केंद्रों से नियमित दवा ले रहे हैं।
एमीएसएसीएस के सहायक निदेशक डॉ. महेंद्र जैन ने बताया कि राज्य में उपचार पहुंच में सुधार हुआ है। हालांकि, 306 मरीजों द्वारा इलाज बीच में छोड़ने और पिछले दो वर्षों में 694 मरीजों की मृत्यु दर्ज होना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सिरिंज शेयरिंग (नशा): 37.8%
मेल-टू-मेल सेक्स: 28.8%
असुरक्षित सेक्स (अन्य): 27.0%
मां से बच्चे में संक्रमण: 6.3%
2023–24: 303
2024–25: 391
2025–26: 183
एआरटी की दवा रोज समय पर लें
हर छह महीने में वायरल लोड और सीडी4 की जांच करवाएं
असुरक्षित संबंध न बनाएं
शराब, सिगरेट और नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं
रक्तदान न करें
टीकाकरण समय पर करवाएं
पौष्टिक आहार और साफ पानी
तनाव कम रखें और सलाहकार से जुड़ें
साथी को जानकारी और टेस्ट कराने की सलाह दें।
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एआरटी मेडिकल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हेमंत वर्मा ने कहा कि एचआइवी पीड़ित को जल्दी उपचार कराने की जरूरत है। अगर मरीज नियमित उपचार लेता है तो वह 40 साल तक भी सामान्य जीवन जी सकता है। नियमित दवा लेने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है।