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नईदुनिया प्रतिनिधि, बुरहानपुर। जिले की सबसे बड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना 'पांगरी बांध' के प्रभावित किसान उचित मुआवजे के लिए बीते तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग और सरकार उनकी गुहार नहीं सुन रहे हैं। इसके चलते किसान तरह-तरह के अनूठे प्रदर्शन कर सरकार को नींद से जगाने का प्रयास कर रहे हैं।
रविवार को डॉ. रवि पटेल के नेतृत्व में किसानों ने एक बार फिर अनूठा आंदोलन किया। उन्होंने उतावली नदी के तट पर भैंसें बांधीं और उनके सामने बीन बजाई। किसानों ने कहा कि उनकी स्थिति भी कुछ इसी तरह की है, वे लगातार सरकार से अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी ओर ध्यान ही नहीं दे रही है। उन्होंने कहा, "सरकार अब तो जागो और किसानों की मांग पूरी करो।"
इससे पहले 31 दिसंबर को भी बड़ी संख्या में किसानों ने एसडीएम नेपानगर के कार्यालय पहुंचकर 'हल्ला बोल' आंदोलन किया था। इसके अतिरिक्त किसान शीर्षासन, पत्थर खाओ और भ्रष्टाचार की मटकी फोड़ने जैसे कई अनूठे विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
डॉ. रवि पटेल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की कीमत का दोगुना मुआवजा और अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है। इस गणना के अनुसार, किसान प्रति हेक्टेयर कम से कम 25 लाख रुपये देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना में आदिवासी किसानों का शोषण किया जा रहा है और जब तक न्याय नहीं मिल जाता, वे संघर्ष करते रहेंगे। आंदोलन में नंदू पटेल, मान्या भिलावेकर, शुमला, मंसाराम, माधो नाटो, बद्री वास्कले, श्रीराम, सालिकराम भिलावेकर, संजय चौकसे सहित अन्य किसान शामिल थे।
पांगरी बांध परियोजना में पांगरी, नागझिरी आदि गांवों के सौ से ज्यादा परिवारों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इस बांध से क्षेत्र की करीब 4,400 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलनी है। 115 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की जल भराव क्षमता 18.5 एमसीएम (MCM) है। किसानों का तर्क है कि सरकार जितना मुआवजा दे रही है, उतनी राशि में वे किसी अन्य स्थान पर खेतिहर जमीन नहीं खरीद सकते। ऐसी स्थिति में किसानों को मजबूरी में मजदूरी करनी पड़ेगी, इसीलिए वे उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हैं।
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