
नईदुनिया प्रतिनिधि, बुरहानपुर। मुआवजे को लेकर विवादों में घिरी जिले की पांगरी बांध परियोजना के प्रभावित किसानों का न तो आंदोलन थम रहा है और न ही सरकार उनकी बात सुनने को तैयार है। लिहाजा दिनोंदिन यह आंदोलन नया रंग ले रहा है। पत्थर खाओ आंदोलन, भैंस के आगे बीन बजाओ और अर्ध नग्न प्रदर्शन सहित कई अनूठे अंदाज में किसान विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
रविवार को प्रभावित किसानों के बच्चों ने इस आंदोलन की बागडोर अपने हाथ में ले ली। किसानों के छोटे-छोटे बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम पत्र लिखा और जमीन का दोगुना मुआवजा देने की मांग की।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा कि प्रशासन कानून को जिस तरह से तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहा है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। विधिवत दो गुना मुआवजा एवं सांत्वना राशि मिलनी चाहिए। आंदोलन कर रहे सभी बच्चों ने अपनी तख्ती में हमें न्याय चाहिए तथा जय जवान जय किसान आदि स्लोगन लिख रखा था। इस दौरान नंदू पटेल, राहुल राठौर, संजय चौकसे, माधो नाटो, कालू चौकसे, ओमप्रकाश सहित अन्य किसान मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना में पांगरी, बसाली और नागझिरी गांव के तीन सौ से ज्यादा परिवारों की 287 हेक्टेयर भूमि डूब में गई है। दुखद पहलू यह है कि पांगरी बांध का निर्माण करने वाली एजेंसी जल संसाधन विभाग ने अब तक न तो इन परिवारों के विस्थापन की कोई योजना बनाई है और न ही ऐसी परियोजनाओं के लिए होने वाले कई सर्वे कराए हैं। जिला प्रशासन किसानों को कलेक्टर दर से भूमि की कीमत और उतनी ही पारितोषिक राशि दे रहा है।
डॉ. रवि कुमार पटेल का कहना है कि भूमि अधिग्रहण कानून में स्पष्ट उल्लेख है कि भूमि की कीमत का दोगुना मुआवजा और पारितोषिक राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डूब में गई भूमि गन्ना, केला और कपास पैदा करने वाली भूमि थी। जो दाम प्रशासन दे रहा है उतने में दूसरी जगह कृषि भूमि नहीं खरीदी जा सकती। इसीलिए वे विरोध कर रहे हैं।
डॉ. रवि पटेल के अनुसार मुआवजे को लेकर दो बार जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। इसके साथ ही जल संसाधन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट से भी किसान भेंट कर चुके हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को मामला सुलझाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ। जिसके कारण बांध के बाद नहरों आदि का निर्माण कार्य रुका हुआ है।