
नईदुनिया प्रतिनिधि, बुरहानपुर। जिले की मध्यम सिंचाई पांगरी बांध परियोजना के प्रभावित किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर बीते तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसान हितैषी सरकार ने उनसे बात करने तक की जरूरत महसूस नहीं की।
अनूठे आंदोलनों को लेकर सुर्खियों में रहे इन किसानों ने गुरुवार को फिर आदि मानव बन कर अनूठा आंदोलन किया। निर्वस्त्र किसानों ने अपने शरीर पर केले के पत्ते लपेटे और नारे लगाकर सरकार को जगाने का प्रयास किया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रवि पटेल ने कहा कि सरकार जब तक प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं देती, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
बता दें कि गुरुवार को प्रदेश के जल संसाधन और जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट भी जिले के प्रवास पर थे, लेकिन उन्होंने न तो किसानों से चर्चा कर उनका दर्द जानने का प्रयास किया और न ही किसानों से भेंट करने अथवा उनकी समस्या का समाधान करने का प्रयास किया। वे भाजपा कार्यकर्ताओं से स्वागत कराने के बाद वापस लौट गए।
रवि पटैल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में दो गुना मुआवजा एवं तोषण का अधिकार है, जो उन्हें मिलना चाहिए। इसी को लेकर सरकार और किसान आमने-सामने हैं। इस अनोखे आंदोलन में किसानों ने केले के पत्ते कमर में लपेटे और सर पर सागौन के पत्ते बांधकर कर सरकार से दोगुना मुआवजे देने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान आदिमानव हो जाएं। उन्हें न स्वास्थ्य, शिक्षा, और सुविधा की आवश्यकता है न उन्हें रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरत है। इसीलिए न्यूनतम मुआवजा दे रही है।अगर सरकार का यही रवैया रहा तो विवश होकर उग्र आंदोलन करना होगा।
डा. रवि पटेल ने कहा कि इस आंदोलन में किसानों ने मौलिक अधिकार राइट टू लाइफ विथ डिग्निटी का भी जिक्र किया है। यह मौलिक अधिकार है और 300 ए के अनुसार भूमि पर किसानों का संवैधानिक अधिकार है। बिना पारदर्शिता और उचित मुआवजे के सरकार किसानों की भूमि जबरन नहीं ले सकती। यह सर्वोच्च न्यायालय का फैसला है। इसी को आधार बनाकर किसान विभिन्न प्रकार के अनूठे आंदोलन कर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित कर अपनी मांगों को मनवाने के लिए सतत प्रयासरत हैं। किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से सहभाग कर अपनी व्यथा और सत्य के प्रति अपनी निष्ठा एवं कटिबद्धता को दोहराया है। इस दौरान नंदू पटेल, संजय चौकसे, माधो नाटो, बद्री वास्कले, मान्या भिलावेकर, मामराज, नवल भाई, राहुल राठौर, शालिग्राम भिलावेकर सहित अन्य किसान मौजूद थे।