
छिंदवाड़ा, नईदुनिया प्रतिनिधि। जुन्नारदेव के तामिया मार्ग पर स्थित एक शासकीय कार्यालय के पास एक लावारिस थैली में मिठाई रखी हुई थी, जिसका सेवन करने से एक की मौत हो गई है। चार लोगों की तबीयत बिगड़ गई है, जिनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो की हालत अब तक गंभीर बनी हुई है।
इस मामले में स्थानीय पुलिस विभाग और जिले का खाद्य विभाग अमला सक्रिय हो गया। पुलिस ने चौकीदार दसरू यदुवंशी के मृत्यु होने के बाद मर्ग कायम किया है। जिला कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने जुन्नारदेव पहुंचकर शहर के लगभग समस्त मिष्ठान प्रतिष्ठानों से सैंपल ले लिया है। पुलिस ने इस मिठाई के डब्बे में रखी शेष बची मिठाई को जप्त कर उसे जांच के लिए लैब भेजने की बात कही है।
मृतक दसरू यदुवंशी का अंतिम संस्कार उसके परिजनों ने कर दिया है। अन्य चार बीमार लोगों में से दो की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अन्य दो अब खतरे से बाहर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पीएचई कार्यालय के पास यह मिठाई का डिब्बा करीब तीन दिनों तक लावारिस अवस्था में पड़ा रहा। न तो उस पर किसी प्रतिष्ठान का नाम अंकित था और न ही ऐसी मिठाई नगर के किसी स्थानीय मिष्ठान विक्रेता द्वारा बनाई जाती है। बावजूद इसके, व्यस्त मार्ग पर पड़े इस डिब्बे को न हटाया गया और न ही इसकी सूचना किसी जिम्मेदार विभाग को दी गई।
बताया जा रहा है कि करीब ढाई सौ ग्राम के इस डिब्बे में आठ पीस मिठाइयां थीं। प्रत्येक मिठाई पर तीन-तीन काजू लगाए गए थे। मौजूदा समय में एक काजू की कीमत करीब तीन रुपये है। इस हिसाब से केवल काजू की कीमत ही लगभग 70 रुपये से अधिक बैठती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में किसी स्थानीय मिष्ठान विक्रेता द्वारा इतनी महंगी सजावट वाली मिठाई बेचना व्यावहारिक नहीं है। यही तथ्य इस आशंका को मजबूत करता है कि मिठाई किसी खास उद्देश्य से बाहर से लाई गई थी।
सबसे अहम बात यह है कि इस मिठाई के सेवन से केवल एक ही स्थान पर यह घटना सामने आई। यदि मिठाई सामान्य रूप से दूषित होती, तो अन्य स्थानों से भी बीमार लोगों के मामले सामने आते। लेकिन बीते 72 घंटों में न तो शासकीय अस्पताल और न ही निजी चिकित्सकों के पास ऐसे किसी अन्य मरीज की जानकारी मिली। इससे स्पष्ट होता है कि यह कोई सामान्य खाद्य विषाक्तता का मामला नहीं है।
मिठाई खाने के बाद पीएचई विभाग में कार्यरत दसरू यादववंशी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल जुन्नारदेव के सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर हालत के चलते जिला अस्पताल रेफर किया गया। बाद में परिजन उन्हें जिले के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई। वहीं मिठाई खाने वाले चार अन्य लोग अब भी गंभीर हालत में इलाजरत बताए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर परिजनों से पोस्टमार्टम न कराने का पत्र लिखवाकर शव सौंप दिया। कुछ ही घंटों में अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। अब ऐसे में मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जरूरी पोस्टमार्टम और विसरा जांच संभव नहीं हो पाएगी, जिससे पुलिस जांच को बड़ा झटका लगा है।
घटना स्थल के आसपास एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं होना भी जांच के लिए गंभीर चुनौती है। यह इलाका शाम के बाद लगभग सुनसान हो जाता है, जबकि आसपास नगर पालिका, एमपीईबी और पीएचई जैसे शासकीय कार्यालय स्थित हैं। यदि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर यह मिठाई रखी गई, तो बिना तकनीकी साक्ष्यों के सच्चाई तक पहुंचना मुश्किल होगा।
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि मिठाई को जानबूझकर किसी खास व्यक्ति को टारगेट कर रखा गया हो सकता है। पूरे घटनाक्रम, सीमित दायरे में असर, महंगी बनावट और जांच में अहम कड़ियों के अभाव ने इस मामले को और भी रहस्यमय बना दिया है। अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि वह इस मौत के पीछे की सच्चाई को कैसे उजागर करती है।