
नईदुनिया प्रतिनिधि, छिंदवाड़ा। शहर के हृदय स्थल फव्वारा चौक पर सोमवार शाम एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई। यहाँ एक दंपत्ति की छोटी सी लापरवाही उनके डेढ़ साल के मासूम बच्चे की जान पर बन आई। माता-पिता बच्चे को कार के अंदर छोड़कर शॉपिंग में व्यस्त हो गए, जबकि कार की चाबी अंदर ही रह गई और गाड़ी लॉक हो गई। एक कार की चाबी अंदर ही छूट गई थी, जिससे गाड़ी ऑटो-लॉक हो गई और बच्चा अंदर ही कैद हो गया। भीड़ जुटने पर हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार का कांच तोड़कर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
इस पूरी घटना में अस्पताल में कार्यरत निलेश नामक युवक ने नायक की भूमिका निभाई।जब लोग समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें, तब निलेश ने तत्काल कार का शीशा तोड़ा और बच्चे को बाहर निकाला।
विशेषज्ञों और चश्मदीदों के अनुसार, अगर बच्चे को निकालने में 15 मिनट की और देरी हो जाती, तो दम घुटने के कारण स्थिति बेहद गंभीर या जानलेवा हो सकती थी।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि कार किसी 'विश्वकर्मा' परिवार की थी। जैसे ही बच्चा सुरक्षित बाहर निकला और लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा, परिवार वहां से तुरंत निकल गया। सोशल मीडिया पर लोग माता-पिता की इस घोर लापरवाही की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
एक जागरूक नागरिक और आपके साथी के तौर पर, यह समझना जरूरी है कि धूप या सामान्य मौसम में भी बंद कार खतरनाक क्यों है। कार के अंदर हवा का संचार रुक जाता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर तेजी से बढ़ता है।धूप में खड़ी कार का तापमान बाहरी तापमान से 20-30 डिग्री ज्यादा तक पहुँच सकता है।
बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में 3 से 5 गुना तेजी से गर्म होता है, जिससे उन्हें 'हीट स्ट्रोक' होने का खतरा रहता है। शॉपिंग या किसी भी काम के लिए बच्चों को अकेले कार में छोड़ना एक कानूनी और मानवीय अपराध है। आज निलेश की सजगता से एक अनहोनी टल गई, लेकिन हर बार किस्मत साथ नहीं देती।
बताया जा रहा है कि अगर रेस्क्यू में 15 मिनिट की देरी हो जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। हॉस्पिटल में काम करने वाले निलेश ने समय रहते बच्चे का रेस्क्यू कर लिया। बताया जा रहा कि बच्चे की उम्र करीब डेढ़ साल की है।