
नईदुनिया प्रतिनिधि, छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले की चौरई तहसील में करीब 38 साल पहले सरकार ने किसानों से जमीन लेकर पावर प्लांट बनाने के लिए अडानी ग्रुप को दी थी। किसानों का आरोप है कि जमीन के बदले नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन पावर प्लांट का काम शुरू नहीं हुआ। इस वजह से किसानों को नौकरी नहीं मिली और उनकी जमीन भी बंजर हो गई।
किसानों ने करीब आठ साल पहले विरोध शुरू किया और सरकार से जमीन वापस देने की मांग की। अब इसी जमीन पर पावर प्लांट की जगह अडानी ग्रुप न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है। इसे लेकर किसानों का कहना है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट बनने से पूरे इलाके में नुकसान होगा। इसलिए उन्हें उनकी जमीनें वापस कर दी जाएं और न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को कैंसिल किया जाए।
चौरई तहसील के ग्राम चौसरा में थर्मल पावर प्लांट के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में हिवरखेड़ी, चौसरा, धनौरा, डागावानी, पिपरिया और थावड़ी सहित आसपास के अन्य गांवों के किसान है। इन सभी ने सामूहिक रूप से क्षेत्र में न केवल न्यूक्लियर पावर प्लांट अपितु थर्मल और अन्य प्रकार के पावर प्लांट की स्थापना को लेकर असहमति व्यक्त की है।
किसानों के अनुसार, भूमि के संबंध में पहले से न्यायालयीन प्रकरण भी विचाराधीन हैं और लगभग 38 वर्षों से भूमि पर किसानों का कब्जा चला आ रहा है। किसानों ने कहा कि शासन द्वारा भूमि का अधिग्रहण कागजों में किया गया। उन्हें न तो मुआवजा मिला और ना ही कोई अन्य हितलाभ। इस मामले का विधि एवं राजस्व रिकार्ड के अनुसार निराकरण किया जाना चाहिए।