
नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। पत्नी और तीन बच्चों की कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले द्वारका पटेल को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पूछताछ में उसने कहा पत्नी के छोटे भाई से संबंध थे इसलिए उसे मार डाला। वारदात वाले दिन वह पत्नी को अपने साथ दिल्ली ले जाने गांव आया था।
कबीरपुर गांव के निवासी द्वारका ने 19 सितंबर की सुबह पत्नी खेमाबाई 27 वर्ष, बेटी उर्मिला सात वर्ष, बेटे उमेश चार वर्ष और राजा एक वर्ष पर हमला किया था, चारों की मौके पर ही मौत हो गई थी। आरोपी द्वारका पटेल दिल्ली में मजदूरी करता है, परिवार का मर्डर करने के बाद वह करीब तीन घंटे तक घर के बाहर कुल्हाड़ी रखकर बैठा रहा था।
आरोपी द्वारका ने कहा कि उसे पत्नी-बच्चों को मारने का कोई पछतावा नहीं है, वारदात की वजह जानने के लिए जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर कबीरपुरा गांव पहुंची, 500 की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर लोग मजदूरी करते है। कुछ पक्के लेकिन ज्यादातर खपरैल वाले कच्चे मकान है, द्वारका पटेल के घर का कच्ची कोठरी द्वारका और बगल वाली उसके छोटे भाई हरिशंकर की है।
ग्रामीण लोगों ने कहा कि महिलाएं भजन गाती रहीं तो पुरुष आपस में चर्चा करते रहे, रात करीब 10 बजे सभी अपने-अपने घर चले गए। सुबह जिस खबर से गांववालों की सुबह हुई उसकी कल्पना भी नहीं की थी। पता चला कि द्वारका ने पत्नी और तीन बच्चों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी है।
द्वारका की कोठरी के अंदर गए तो मिट्टी के बने चबूतरे पर बिछा बड़ा सा गद्दा खून से सना दिखा। दीवार पर खून के छींटे नजर आ रहे थे जमीन भी लाल है। ग्रामीणों ने घर के सामने की वो जगह भी बताई जहां द्वारका बैठा था। यहीं से उसने सुबह अपने चाचा हरगोविंद पटेल को पत्नी और तीनों बच्चों की हत्या करने की बात बताई थी।
हरगोविंद ने बताया कि सुबह करीब साढ़े छह बज रहे थे, मैं घर से बाहर निकला। थोड़ी दूर ही द्वारका रहता है, जैसे ही उसके घर के पास पहुंचा हैरान रह गया। वो खून से सनी कुल्हाड़ी लिए बैठा था उठता और अपनी कोठरी के सामने चक्कर लगाकर फिर बैठ जाता।
पास पहुंचा तो उसने कहा यहां नहीं आना मार डालूंगा, मैंने सभी को मार डाला, वो चिल्लाकर बोला कि अब पुलिस को बुलाओ। उसने कहा मेरे छोटे भाई हरिशंकर से पत्नी के संबंध थे वो दिल्ली से उसे भगा ले जाने के लिए आया था। करीब एक घंटे बाद पुलिस आईए तो उसने कुल्हाड़ी पुलिसवालों को दी, पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
ताऊ धनीराम ने बताया कि वारदात के बाद खेमा के पिता बाबूलाल और मैं अपने गांव करैया भदौली से नाते-रिश्तेदारों के साथ कबीरपुरा आए थे। दामाद शराब पीकर भतीजी के साथ रोज मारपीट करता था, दो महीने पहले उसे हंसिया मारा था, हाथ में जख्म हुआ था।
खेमा ने रिपोर्ट कराई थी, इसके बाद वो बच्चों को लेकर मायके आ गई, डेढ़ महीने वहीं रही। खेमा के पिता बाबूलाल ने कहा अदालत ने राजीनामा करने कहा तो खेमा ने भी बच्चों की खातिर द्वारका को माफ कर दिया। रक्षाबंधन के बाद द्वारका ससुराल आया उसने खेमा को परेशान नहीं करने की कसम ली, इसके बाद हमने बच्चों और खेमा को उसके साथ भेज दिया।
द्वारका पटेल ने कहा पत्नी खेमा के छोटे भाई हरिशंकर से प्रेम संबंध थे, समझाने पर भी नहीं मान रही थी। दो महीने पहले भी इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था, तब मैंने उसे हंसिया मारा था, फिर भी वो बाज नहीं आ रही थी। शनिवार सुबह कुल्हाड़ी से पत्नी और तीनों बच्चों की हत्या कर दी, इससे पहले रात में विवाद हुआ था भाई तभी दिल्ली भाग गया था।
हरिशंकर दिल्ली में गार्ड की नौकरी करता है, जब भी वह गांव आता था देवर-भाभी के बीच बातचीत होती थी। यह बात द्वारका को अच्छी नहीं लगती थी, इसे लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होता था। वारदात की शाम भी हरिशंकर गांव आया था, उसके दिल्ली रवाना होने के बाद आरोपित ने हत्या करने की ठानी।
आरोपी से पूछा गया कि बच्चों को क्यों मारा तो उसने बताया कि पत्नी को मारने के बाद वह जेल चला जाता, ऐसे में बच्चों को कौन संभालता इसलिए उन्हें भी खत्म कर दिया।
आनंद कलादगी, पुलिस अधीक्षक, दमोह
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