
नईदुनिया प्रतिनिधि, दतिया। साल 2022 में कुपोषण नियंत्रण के नवाचारों के लिए दतिया जिले को सम्मानित किया गया था। लेकिन, अब एक बार फिर यहां कुपोषण से मौत का गंभीर मामला सामने आया है। उदगंवा क्षेत्र के सलैया पमार आदिवासी डेरा में 1 साल की मासूम नीलू आदिवासी ने सोमवार शाम इलाज के बाद घर लौटते ही दम तोड़ दिया। बच्ची को 10 अगस्त को उल्टी दस्त की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां भर्ती के समय उसका वजन महज 5.2 किलोग्राम था। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची गंभीर रूप से एनीमिक (खून की कमी) थी। यहां तक कि उसे पीआईसीयू (PICU) में वेंटिलेटर पर भी रखा गया था। अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ी और मौत हो गई।
सलैया पमार आदिवासी डेरे में कुपोषण की स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार गांव में 6 बच्चे अतिकुपोषित (SAM) हैं, जबकि कई अन्य बच्चे मध्यम कुपोषण (MAM) की श्रेणी में आते हैं:
स्वास्थ्य और आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे परिजनों को बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन दिहाड़ी मजदूरी और कामकाज छूटने के डर से परिजन जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
इस मामले के बाद कई ग्रामीणों की शिकायत सामने आई है-
मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। इसे लेकर कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कहा कुपोषित बच्ची की मौत के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें- दतिया: रिश्ते के मामा ने ही नाबालिग से किया दुष्कर्म, खेत में दिया वारदात को अंजाम, आरोपी पर केस दर्ज