
भांडेर। नईदुनिया न्यूज।
तहसील मुख्यालय भांडेर से करीब 12 किमी दक्षिण-पूर्व में भांडेर-चिरगांव मार्ग पर ग्राम भर्रोली में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण का कार्य शुरू किया गया है। इसके तहत जहां मंदिर के चारों तरफ बाउंड्री बाल निर्माण का कार्य चल रहा है। वहीं आसपास से अतिक्रमण हटाने को लेकर भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस मंदिर के निर्माण को लेकर जनमानस तथा पुरातत्व विभाग की अपनी-अपनी मान्यताएं और आंकलन है। पुरातत्व विभाग अपने शोध और वास्तुशैली के आधार पर इसका निर्माणकाल 10वीं-11वीं सदी में ग्वालियर के कच्छपघात शासकों द्वारा निर्मित बताता है। ऐतिहासिक दृष्टि से इस मंदिर का अपना विशिष्ट ही स्थान है। यहां वर्ष में दो अवसरों पर लोगों की सर्वाधिक चहलपहल रहती है। पहले महाशिवरात्रि पर तथा दूसरे श्रावण मास के सोमवार को। इस मंदिर के रखरखाव और सौंदर्यीकरण के मामले में पुरातत्व विभाग और स्थानीय पंचायत स्तर पर उपेक्षित सा है और प्रचार प्रसार का भी अभाव है। लिहाजा पर्यटन की संभावनाएं न के बराबर है। इस मंदिर की एतिहासिकता को और नगण्य करने का श्रेय यहां के निवासियों को भी जाता है। यहां मंदिर के आसपास अतिक्रमण के साथ ही कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
मंदिर अतिक्रमण की चपेट में
पूर्व में इस मंदिर के आसपास स्थानीय लोग अपने कृषि उपकरण रखते थे और गौवंश का ठिकाना बनाए हुए थे। जिसके चलते यहां अव्यवस्था और गंदगी व्याप्त थी। पुरातत्व विभाग के संज्ञान में लाए जाने के बाद मंदिर परिसर के चारों ओर सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल निर्माण की पहल की गई। यहां कब्जा करे बैठे स्थानीय लोगों ने बाउंड्री बाल निर्माण का विरोध भी किया। जिसके कारण कुछ समय तक काम ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन अब इस मंदिर की सुरक्षा के लिए फिर से बाउंड्रीवाल का निर्माण जनपद पंचायत भांडेर के माध्यम से किया जा रहा है। 5 लाख रुपये की लागत से लगभग 6 फीट ऊंचा और 90 मीटर लंबा सुरक्षित घेरा बनाया जाएगा। जिससे स्थानीय वाशिंदों के अतिक्रमण और बेसहारा पशुओं द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी से मंदिर परिसर को मुक्ति मिल सकेगी। लेकिन इसके बाद पंचायत के सामने मंदिर के आसपास फैली गंदगी को रोकने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। हालांकि जनपद पंचायत और स्थानीय पंचायत को भरोसा है कि इस मामले में भी वे यहां के लोगों का मन बदलने में सफल हो सकेंगे।
घूरे हटवाकर डस्टबिन रखवाए जाएंगे
वर्तमान में मंदिर के आसपास ग्रामीणों ने घूरे बनाकर वहां अस्वच्छ वातावरण बना रखा है। यह गंदगी इस प्राचीन धरोहर पर धब्बे के समान है। शिवरात्रि के मद्देनजर जनपद सीईओ भांडेर द्वारा निर्देशित किए जाने पर ग्राम पंचायत ने सफाई करवा दी थी। लेकिन यह तात्कालिक अस्थाई सफाई व्यवस्था थी। दीर्घकालिक व्यवस्था के तहत जब तक स्थानीय ग्रामीणों को स्वच्छता के लिए प्रेरित नहीं किया जाता, मंदिर के वैभवशाली गौरव को कायम करना असंभव है। हालांकि जनपद सीईओ भांडेर का कहना है कि बाउंड्रीवॉल के निर्माण के बाद मंदिर के आसपास डस्टबिन व्यवस्था की जाएगी।
इनका कहना है
बाउंड्रीवाल का निर्माण पुरातत्व विभाग को करवाना था। लेकिन ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण की दृष्टि से अब पंचायत द्वारा इसका निर्माण कराया जा रहा है। जहां तक गंदगी का मामला है तो बाउंड्रीवाल निर्माण के बाद इस समस्या का भी निराकरण करवा दिया जाएगा। - श्यामसुंदर भटनागर, सीईओ जनपद पंचायत भांडेर।
--
बाउंड्रीवाल का निर्माण जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है और हमें भी इसकी जानकारी है। पुरातत्व विभाग को इस निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है। - पीसी महोबिया, उपसंचालक पुरातत्व विभाग ग्वालियर।