Pitambara Peeth Temple : चीन युद्ध को जीतने पंडित नेहरू ने मां पीतांबरा पीठ में कराया था हवन
Pitambara Peeth Temple : कहते हैं कि मां पीतांबरा पीठ में हवन के बाद चीन ने अपनी सेना वापस बुला ली थी। ...और पढ़ें
By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 25 Dec 2019 03:26:41 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Dec 2019 03:27:52 PM (IST)

दतिया। Pitambara Peeth Temple मां पीतांबरा पीठ पूरे देश में मशहूर है। मान्यता है यहां मां के दरबार में किए गए हवन यज्ञ कभी असफल नहीं होते हैं, माथा टेकने पर बिगड़े हुए काम भी बनते हैं। बड़ा उदाहरण है 1962 में यहां हुआ हवन यज्ञ। दरअसल, तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चीन पर विजय पाने के लिए मंदिर के महंतों से हवन कराया था। इसके बाद चीन ने अपनी सेना को वापस बुला लिया था। इसके प्रणाम मां पीताम्बरा मंदिर में भी देखने को मिलते हैं। भारत और चीन में युद्ध छिड़ा हुआ था, उस समय देश में आर्थिक संकट छा गया था और देश विषम परिस्थितियों की ओर बढ़ रहा था।
तभी पंडित नेहरू को उनके सलाहकारों ने बताया कि मां के मंदिर में पूजा अर्चना और हवन यज्ञ कराने से हम पर आ रही विपदा का निराकरण हो सकता है। हवन के अंतिम दिन पूर्णआहूति दी गई और उसी समय यह समाचार मिला कि चीन ने अपनी सेना वापस बुला ली है और युद्ध पर विराम लग गया है। इस घटना के बाद से पीताम्बरा मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ गई।
राजसत्ता के लिए मशहूर मां का मंदिर
मां बगुलामुखी राजसत्ता के लिए भी महशूर मानी जाती हैं। यहां पर राजनेता के साथ-साथ कई राजनीतिक दिग्गज भी अपनी दस्तक दे चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अलावा यहां पंडित जवाहरलाल नेहरू, राहुल गांधी के अलावा अमित शाह, राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे सिंधिया, दिग्गविजय सिंह, कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान सहित अभिनेता संजय दत्त सहित अनेक लोग यहां पर आकर पूजा अर्चना कर चुके हैं।
एक दिन में 3 बार रूप बदलती हैं मां
पीतांबरा पीठ मंदिर की एक और मान्यता है, यहां विराजित मां बगुलामुखी एक ही दिन में अपने तीन रूप बदलती हैं। बदला हुआ रूप प्रात: दोपहर और शाम के समय देखा जा सकता है। यह वहां के लोगों के लिए सामान्य है, लेकिन बाहर के लिए नही।