
दीपक विश्वकर्मा, नईदुनिया, देवास : चंदाना शराब कांड में लोगों की जान जाने के बाद अब इस मामले ने अपराध के एक नए तरीके की ओर ध्यान खींचा है। जांच में सामने आया है कि आरोपित ने शराब बनाने और उसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल की जानकारी जुटाने के लिए एआई की मदद ली थी।
यानी अब किसी तकनीकी जानकार या विशेषज्ञ तक पहुंच के बिना भी घर बैठे ऐसी जानकारियां जुटाई जा सकती हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों की जान से खिलवाड़ करने में हो सकता है। ऐसे में सवाल केवल खतरनाक शराब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह है कि जिले में कहीं भी कोई व्यक्ति शराब बनाने के नाम पर केमिकल का इस्तेमाल करने लगे तो पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी भनक कैसे लगेगी?
चंदाना कांड में शराब बनाने के मामले में आरोपित अजय के मोबाइल को जब कोतवाली पुलिस ने खंगाला तो उसमें एआई पर सनसनीखेज सर्च हिस्ट्री मिली। सर्च हिस्ट्री में कई प्रकार के केमिकल से शराब बनाने संबंधी जानकारी दर्ज है। दूसरी तरफ थिनर के नाम पर मेथनाल बेचने की बात भी सामने आई है। मामले में पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन न तो पुलिस और न ही आबकारी विभाग का तंत्र इस कांड के पहले सक्रिय रहा और न ही वे आरोपितों की धरपकड़ कर पाए।
देवास जिले में शराब की वैध बिक्री के लिए 51 ग्रुप और एकल दुकानों को मिलाकर कुल 95 कंपोजिट दुकानें हैं। इनसे चालू वर्ष में 358 करोड़ रुपये का राजस्व प्रस्तावित है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 361 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद कई ठेकेदारों के घाटे में रहने की बात सामने आ रही है। इसी आर्थिक दबाव के बीच दुकानों के अलावा गांवों में कथित डायरी सिस्टम के जरिए शराब बेचने का नेटवर्क संचालित होने की शिकायतें हैं। जिले की 495 पंचायतों तक इस व्यवस्था की पहुंच होने की जानकारी सामने आई है। इस अनौपचारिक बिक्री व्यवस्था में शराब की अधिकांश आपूर्ति संबंधित क्षेत्र की दुकानों से ही होती है।
शहर के प्रतापनगर के अलावा टोंकखुर्द, भौंरासा, पिपलरावां और बरोठा के डेरों में महुआ से अवैध शराब बनाने की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इन इलाकों में शराब बनाने और उसकी सप्लाय के नेटवर्क को लेकर आबकारी और पुलिस विभाग कार्रवाई तो करते हैं लेकिन कार्रवाई खत्म होते ही फिर से काम शुरू हो जाता है।
पूरे घटनाक्रम की तेजी से जांच की जा रही है। मामले में समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। प्रकरण में सामने आया कि कबाड़ी वालों से उनको सामान मिला, ऐसे में समय-समय पर उनकी भी जांच की जाएगी। एआइ के माध्यम से मिथाइल अल्कोहल का उपयोग ढूंढने की बात भी सामने आई है। कालेज, स्कूल और होस्टलों में मोबाइल और एआइ के उपयोग को लेकर जागरूकता लाई जाएगी। - आदित्य मिश्रा, एसपी देवास
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