
देवास, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। न्यायालय ने एक किशोरी से छेड़छाड़ कर हत्या करने के मामले में नाबालिग अपराधी को 20 साल की सजा सुनाई है। अपराधी घटना के समय नाबालिग था, जिसके चलते पहले किशोर न्यायालय में प्रकरण चला, परन्तु अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण सत्र न्यायालय भेजा गया था। यहां उसके खिलाफ वयस्क की तरह प्रकरण चलाया गया और सजा सुनाई गई।
प्रभारी जिला लोक अभियोजक जयंती पौराणिक ने बताया कि थाना कोतवाली क्षेत्र की निवासी बालिका के साथ अक्टूबर 2018 में वारदात हुई थी।
उस समय मोहल्ले में रहने वाला किशोर बालिका को लगातार परेशान करता और उसका पीछा कर छेड़छाड़ करता था। 30 अक्टूबर की रात आरोपित बालिका के घर के पीछे की ओर खिड़की का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा और बालिका से मारपीट करने लगा।
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इस दौरान उसने बालिका को संबंध बनाने के लिए धमकाया और बात नहीं मानने पर बालिका के उपर केरोसिन डालकर आग लगा दी। बालिका जब बाहर भागी तो उसके पड़ोस में रहने वाली बहन ने आग बुझाई और लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में बालिका ने मरणासन बयान दिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
मामले में कोतवाली पुलिस ने नाबालिग आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया और किशोर न्याय बोर्ड में चालान पेश किया गया। किशोर न्याय बोर्ड जिला देवास ने 24 अप्रैल 2019 को आदेश पारित करते हुए नाबालिग आरोपित को किशोर न्याय अधिनियम की धारा 15 की तहत जघन्य अपराध करने तथा अपराध करने की शारीरिक तथा मानसिक क्षमता को परिपक्व होना निर्धारित करते हुए सुनवाई के लिए 8 मई 2019 को प्रकरण सत्र न्यायालय को भेज दिया।
प्रकरण में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सोनल पटेल ने आरोपित को धारा 449, 302, 354, 354(क)(1)(2)(4) एवं 354(घ) भादंवि में सजा निर्धारित की। धारा 302 भादंवि में 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 1 हजार रुपये का अर्थदंड, धारा 449 भादंवि में 10 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 500 रुपये का अर्थदंड और धारा 354, 354(क) (1)(2)(4) एवं 354(घ) में प्रत्येक में एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास तथा 500-500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी प्रभारी जिला लोक अभियोजक जयंती पौराणिक ने की। कोर्ट मोहर्रित रमेश बर्डे का सहयोग रहा।
शहर में काफी समय से यह बात अधिकारियों के सामने आई थी कि नाबालिग लड़के अपराधों में संलिप्त हो रहे हैं। पिछले दिनों थानों पर हुए जनसंवाद कार्यक्रमों में भी यह बात लोगों ने खुलकर पुलिस के सामने रखी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता रघुवीर यार्दी ने कहा कि न्यायालय के इस फैसले के बाद यह भी तय हो गया है कि अपराधी सिर्फ अपनी उम्र के कारण नहीं बच सकता है।
उन्होंने बताया कि अपराधी की शारीरिक और मानसिक अवस्था यदि वयस्कों की तरह है, तो उसे भी वयस्कों की ही तरह न्याय प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। गंभीर मामलों में 18 वर्ष से कम उम्र होने के बाद भी उन्हें कठोर सजा दी जा सकती है।