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2002 में बना कांस्टेबल, 24 साल में 35 करोड़ की अवैध संपत्तियों का मालिक बन बैठा प्रधान आरक्षक फिरोज खान

वर्ष 2002 में आरक्षक के रूप में पुलिस में भर्ती हुआ फिरोज खान करीब 24 साल में 35 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों का मालिक बन गया। प्रधान आरक्षक ...और पढ़ें

By deepak vishwakarmaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 09:10:12 AM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 09:10:12 AM (IST)
2002 में बना कांस्टेबल, 24 साल में 35 करोड़ की अवैध संपत्तियों का मालिक बन बैठा प्रधान आरक्षक फिरोज खान
वीडियो में फिरोज खान (हाथ में गन लिए) के साथ निरीक्षक महेंद्र पटेल। - सौजन्य

HighLights

  1. पुलिस की नौकरी के साथ लकड़ी के अवैध कारोबार और संपत्तियों में निवेश की चर्चा
  2. सहयोगियों और परिवार के नाम पर भी खरीदीं अचल संपत्तियां
  3. फिरोज खान के साथ फोटो वायरल होते ही विशेष शाखा निरीक्षक का भोपाल तबादला

नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास : वर्ष 2002 में आरक्षक के रूप में पुलिस में भर्ती हुआ फिरोज खान करीब 24 साल में 35 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों का मालिक बन गया। प्रधान आरक्षक के पद तक पहुंचे फिरोज की संपत्तियों पर लोकायुक्त की कार्रवाई ने उसकी कार्यप्रणाली और संपर्कों को चर्चा में ला दिया है।

लोकायुक्त की जांच में अब तक स्वयं, परिवार, परिचितों, सहयोगियों और फर्म के नाम पर 38 अचल संपत्तियां सामने आई हैं। इनकी वर्तमान बाजार कीमत 35.46 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि गाइड लाइन के अनुसार कीमत करीब 12.97 करोड़ रुपये है। जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्तियों का आंकड़ा बढ़ने की संभावना है।


फिरोज के पिता भी पुलिस में प्रधान आरक्षक थे। उनके बाद फिरोज और उसका भाई जावेद भी पुलिस में भर्ती हुए। नौकरी के दौरान फिरोज देवास में यातायात, बीएनपी, कोतवाली और टोंककलां चौकी सहित अलग-अलग स्थानों पर पदस्थ रहा। शुरुआती दौर में ही उस पर गोवंश से भरे वाहनों से अवैध वसूली के आरोप लगे थे।

बाद में अवैध लकड़ी परिवहन के मामले में भी उसका नाम सामने आया। कुछ पुलिसकर्मियों के साथ उसे मंदसौर भेजा गया, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर देवास लौट आया। सितंबर 2024 में फिरोज और उसके भाई जावेद के खिलाफ नगर निगम की बाउंड्रीवॉल तोड़ने के मामले में भी प्रकरण दर्ज हुआ था। अब लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पुलिस इस मामले की भी समीक्षा कर रही है।

वर्दी से ज्यादा संपर्कों में सक्रियता की चर्चा

देवास लौटने के बाद फिरोज लंबे समय तक पुलिस लाइन में रहा। इस दौरान उसकी सक्रियता नियमित पुलिस ड्यूटी के बजाय अधिकारियों से संपर्क बनाए रखने और निजी कामकाज में अधिक होने की चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार उसने सोनकच्छ और पीपलरावां क्षेत्र में लकड़ी के अवैध कारोबार से भी पैसा बनाया। अवैध कटाई और परिवहन में कई वाहनों के इस्तेमाल की बात सामने आती रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होना बाकी है।

परिचितों के नाम पर भी संपत्तियां

लोकायुक्त की जांच में रोशनी वर्मा, नफीस खान और रानु कुशवाह सहित परिचितों के नाम पर खरीदी गई जमीन और भूखंडों का विवरण सामने आया है। साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर भी संपत्ति मिली है। परिवार के नाम पर खरीदी गई जमीनों में बागली तहसील की कृषि भूमि भी शामिल है। इस संबंध में लोकायुक्त पुलिस लगातार जांच कर रही है।

फिरोज खान के साथ फोटो वायरल होते ही विशेष शाखा निरीक्षक का भोपाल तबादला

देवास : इंदौर पीटीसी में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के ठिकानों पर हुई लोकायुक्त सर्च के बाद शनिवार को एक और कार्रवाई सामने आई। फिरोज खान के साथ देवास विशेष शाखा में पदस्थ निरीक्षक महेंद्र पटेल के कुछ फोटो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुए थे।

इनमें से एक फोटो में निरीक्षक पटेल बैठे हुए थे, जबकि फिरोज खान हाथ में पिस्टल लिए खड़ा था। अलग-अलग फोटो इंटरनेट मीडिया पर सामने आने के बाद देवास में कई वर्षों से पदस्थ निरीक्षक का भोपाल मुख्यालय का बदला कर दिया गया। निरीक्षक के तबादले के बाद भी इंटरनेट मीडिया पर लोग कई तरह की चर्चा करते रहे। बता दें कि लोकायत सर्च के बाद फिरोज के साथ कई लोगों की तस्वीरें इंटरनेट मीडिया में तेजी से बहुप्रसारित हो रही हैं।

यह भी पढ़ें- लोकायुक्त की रडार पर फिरोज खान का नेटवर्क, देवास से इंदौर तक फैली अचल संपत्ति, बाजार कीमत 35.46 करोड़ रुपये