
सत्येंद्र सिंह राठौर, नईदुनिया, देवास : निजी स्कूलों की तर्ज पर हाईटेक सुविधाओं से लैस सांदीपनि विद्यालय का नया भवन पुराने उत्कृष्ट विद्यालय के परिसर में तैयार होने के कारण जिला मुख्यालय से 62 किमी दूर बागली में नगर का एकमात्र मैदान समाप्त हो गया। इससे खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए जगह का संकट खड़ा हो गया, नगर में कहीं पर भी दूसरे मैदान की व्यवस्था नहीं थी।
खिलाड़ियों की यह समस्या शिक्षक हेमेंद्र शिवहरे को पता चली तो उन्होंने खिलाड़ियों व जनसहयोग से नया मैदान तैयार करने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने व खिलाड़ियों ने नगर में ऐसी जमीन की तलाश शुरू की जो सुविधाजनक रहे व उसके उपयोग में किसी प्रकार की बाधा न रहे।
जल्द ही प्रयासों को सफलता मिली और बागली-चापड़ा मार्ग से लगी वन विभाग की ऐसी भूमि चिन्हित की गई जो अनुपयोगी थी। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई, उनसे अनुमति लेने के बाद शुरू हुुआ इस जमीन को मैदान में बदलने का काम।
शुरुआत में ही इस काम में कड़ी मेहनत करना पड़ी क्योंकि जो जमीन चिन्हित की गई थी वो ऊबड़-खाबड़ थी, मशक्कत के बाद इसे समतल किया गया। शिक्षक शिवहरे से लेकर खिलाड़ियों, समाजसेवियों ने इस कार्य में पसीना बहाया। आखिरकार 15-18 दिनों की मेहनत के बाद मैदान तैयार हो गया। वर्तमान में इस मैदान पर सुबह व रात में 40-50 खिलाड़ी फुटबाल का अभ्यास कर रहे हैं।
शिक्षक शिवहरे ने बताया बागली में करीब 20 साल से खिलाड़ी फुटबॉल का अभ्यास कर रहे हैं। नया स्कूल भवन बनने के बाद कोई मैदान नहीं बचा तो इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया। इसके माध्यम से नगरवासियों को बताया गया कि इतने बड़े नगर में खिलाड़ियों के लिए मैदान नहीं है।
हमने सहयोग मांगा तो लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए। इसके बाद वन विभाग की चिन्हित भूमि को नेट से कवर किया गया। 20 पोल लगाए, हाईमास्ट लगाए गए। बिजली कनेक्शन की समस्या थी तो नगर परिषद अध्यक्ष सीमा यादव, प्रतिनिधि कमल यादव से सहयोग मांगा, इसके बाद नगर परिषद की स्ट्रीट लाइट से कनेक्शन मिला और आखिरकार खिलाड़ियों को नया मैदान मिल गया।
यहां प्रतिदिन सुबह व रात में खिलाड़ी फुटबॉल का अभ्यास करने पहुंच रहे हैं। जिस समय मैदान तैयार किया गया उस समय शिक्षक शिवहरे बागली के समीप छतरपुरा में पदस्थ थे, इस सत्र में वे उच्च श्रेणी शिक्षक के रूप मेंं सांदीपनि विद्यालय बागली में आ चुके हैं।
मैदान को तैयार करने में जनप्रतिधि, शिक्षक, डॉक्टर सहित समाजसेवियों ने सहयोग किया। विपिन शिवहरे मित्रमंडल ने बिजली व्यवस्था, नेट आदि का खर्च उठाया। नया मैदान 45 बाय 90 मीटर का है। फुटबाल प्रशिक्षक भवानी सोलंकी के अनुसार इस तरह के मैदान को सामान्य बोलचाल में फुट सल मैदान कहा जाता है जो फुटबाल खेलने के उपयोग में आता है। यह फुटबाल के मुख्य मैदान की तुलना में छोटा व आयताकार होता है।
शिक्षक शिवहरे ने बताया फुट सल वाले मैदानों का चलन इंदाैर में अधिक है। वहां जगह की कमी है और खिलाड़ियों की संख्या भी अधिक है। वहां अभ्यास के लिए 1500 रुपये लिए जाते हैं। बागली का मैदान खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह से निश्शुल्क है।
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