
चंद्रप्रकाश शर्मा, नईदुनिया, देवास : देवास इन दिनों सुर्खियों में है...किसी उपलब्धि के कारण नहीं, बल्कि इसके भाल पर लगे अवैध शराब के धब्बे के कारण। पहले चंदाना-बिंजाना और अब खातेगांव...। सुस्त सिस्टम और भटकी हुई सियासत के कारण देवास जिला शराब माफियाओं का गढ़ बन गया। खाकी तक सुरक्षित नहीं रही। अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे तो नेताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई। अहम सवाल यही रहा कि क्या बिना राजनीतिक संरक्षण और अफसरों की सांठगांठ से यह संभव है।
दरअसल, चंदाना में शराब से हुई मौतों के मामले ने जिले में अवैध शराब के कारोबार की जड़ें उजागर कर दीं। अब खातेगांव में अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने के दौरान थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने इस कारोबार के दूसरे चेहरे को सामने ला दिया है।
एक तरफ गांवों में अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय है, दूसरी तरफ शराब की तस्करी रोकने के दौरान पुलिस अधिकारी की जान जा रही है। इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर है। देवास जिले के सभी थाना क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री के ठिकाने होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
कई गांवों और बस्तियों में शराब कहां मिलती है, कौन बेचता है और किस माध्यम से सप्लाइ होती है, यह स्थानीय लोगों को तक पता है। ऐसे में संबंधित थानों को इसकी जानकारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। यदि जानकारी है तो इन ठिकानों पर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं होती और यदि जानकारी नहीं है तो बीट व्यवस्था, मुखबिर तंत्र और गश्त का क्या उपयोग।
अवैध शराब के मामलों में पुलिस की कार्रवाई अक्सर कुछ विक्रेताओं की गिरफ्तारी और शराब जब्ती तक सिमट जाती है, जबकि कारोबार को चलाने वाले सप्लायर, परिवहन करने वाले लोग और उन्हें संरक्षण देने वाले चेहरे जांच के केंद्र में नहीं आते। कहा यह भी जाता है कि अवैध शराब का कारोबार एक दिन में खड़ा नहीं होता। इसके लिए लगातार सप्लाइ, बिक्री के ठिकाने, ग्राहकों का नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर निर्बाध संचालन जरूरी है। यह सब बिना स्थानीय नेताओं के संरक्षण के संभव नहीं है। राजनीतिक संरक्षण के चलते पुलिस भी कार्रवाई में ढिलाई दिखाती है।
अवैध शराब सहित नशे के अन्य कारोबारों पर राजनीतिक संरक्षण की पुष्टि सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी की इंटरनेट मीडिया पोस्ट से हो रही है। सांसद ने पिछले दिनों पोस्ट में साफ लिखा कि स्व. दिलीप पुरी को सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब देवास शराब माफियाओं और उनको संरक्षण देने वालों से मुक्त हो जाएगा। इसके पूर्व भी सांसद की नशे के कारोबार को संरक्षण देने वालों को निशाना बनाते हुए की गई पोस्ट चर्चाओं में रही हैं। सांसद की पोस्ट के बाद सवाल भी उठे कि आखिर शराब माफियाओं को किसका संरक्षण है। इंटरनेट मीडिया पर भी खातेगांव मामले में राजनीति से जुड़े लोगों के नामों की चर्चा हो रही, लेकिन फिलहाल कोई कुछ नहीं बोल रहा।
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