देवास में नाबालिग से किया था दुष्कर्म, सौतेले पिता को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
रिश्तों को शर्मशार करने वाले सौतेले पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। आरोपित ने सौतेली बेटी से लम्बे समय तक दुष्कर्म किया, जि...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 04:13:33 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 04:16:46 PM (IST)
कोर्ट ने आरोपी को सुनाई सजा। (एआई इमेज)HighLights
- मां, ताऊ और ताई ने नहीं सुनी थी बालिका की शिकायत
- बालिका के गर्भवती होने पर पुलिस तक पहुंचा था मामला
- बालिका अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करती थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास : रिश्तों को शर्मशार करने वाले सौतेले पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। आरोपी ने सौतेली बेटी से लम्बे समय तक दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती भी हो गई। इस बीच बालिका ने अपनी मां, ताऊ और ताई से भी शिकायत की लेकिन सभी ने बालिका की पीड़ा पर कोई ध्यान नहीं दिया। इधर, आरोपी लगातार बालिका से दुष्कर्म करता रहा, जब बालिका गर्भवती हुई तो मामला पुलिस तक पहुंचा।
उपसंचालक अभियोजन गोविंद प्रसाद घाटिया ने बताया कि घटना वर्ष 2024 की है। बालिका अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करती थी। उसकी मां पिता को छोड़कर आरोपित के साथ रहने लगी थी और बालिका को भी उसे पिता मानकर साथ रहने के लिए कहा। कुछ दिन बाद ही सौतेले पिता ने बालिका के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया और वर्षों तक करता रहा।
पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की
जब बालिका गर्भवती हो गई तो आस संस्था को सूचना मिली, जिसके बाद संस्था वाले पीड़ित बालिका को लेकर वन स्टाप सेंटर पहुंचे थे। सेंटर से परामर्श रिपोर्ट तैयार कर बाल कल्याण समिति देवास द्वारा जांच कराई गई। इसके बाद सौतेले पिता, माता एवं ताऊ व ताई के खिलाफ बरोठा पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के बाद पुलिस द्वारा चालान विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) देवास में प्रस्तुत किया गया। विचारण के बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम प्रसन्नसिंह बहरावत ने निर्णय पारित कर आरोपित सौतेले पिता को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा व 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। कोर्ट ने दो वर्ष में ही प्रकरण का निराकरण किया और दोषी को सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक आनंद कुमार नेमा ने की।