
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। खातेगांव टीआई दिलीप पुरी की हत्या के मामले में पुलिस की जांच जारी है। अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपितों से पूछताछ के बाद टिमरनी वाइन शॉप के मैनेजर भूपेंद्र राणा को आरोपित बनाया गया है। कोर्ट में पेश कर उसे रिमांड पर लिया गया है। फरार आरोपित मनीष, मोहिन व पाटेंद्र की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग जगहों पर टीमें भेजी गई हैं। एक टीम गुजरात भी गई है।
एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार, आरोपित जिस वाहन से शराब तस्करी करते थे, उसके फास्टैग का छह माह का डाटा निकलवाया गया है कि वह कब-कब किन-किन टोल से गुजरा था। जांच में राऊ, पीथमपुर, आलीराजपुर के रूट की बात सामने आई है; इसी मार्ग से आवाजाही होती थी। जिस व्यक्ति ने वाहन को मॉडिफाइड किया था, उसको भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है।
राहुल जायसवाल से पूछताछ में पेट्रोल पंप संचालन की बात सामने आई थी। तस्दीक के बाद पता चला कि पंप के दस्तावेज उसके नाम नहीं हैं। अपने शराब के धंधे को छिपाने के लिए वह पंप का सहारा लेता था। बसें भी जब्त की जा रही हैं। हरदा-टिमरनी की तीन दुकानों के ऑफिस से दस्तावेज जब्त किए गए हैं। टिमरनी वाइन शॉप में एक कंबाइंड ऑफिस था, जहां से कुछ दस्तावेज मिले हैं। कैश प्रॉफिट कैसे तीनों पार्टनरों में बंटता था, उसके कागजात व डायरी मिली है। बड़ी संख्या में नकद राशि जब्त की गई है। जिस बैच नंबर की शराब थी, उसके दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
आरोपित विजय राव को लेकर एक टीम इंदौर गई है। पुलिस पता लगा रही है कि क्या विजय राव ने पहले के प्रकरणों में भी आरोपितों की ओर से न्यायालयीन प्रक्रिया में सहभागिता की थी। केरम को लेकर टीम आलीराजपुर की तरफ गई है, जहां शराब सप्लाई के तरीकों की पड़ताल व इससे जुड़े अन्य तथ्य खंगाले जा रहे हैं। उसकी पत्नी व कियोस्क के खाते से वाहन पर बैंक फाइनेंस की किस्त कटने की जानकारी मिली है। कुछ आरोपित फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग जगहों पर टीमें भेजी गई हैं।
इधर, चंदाना शराब कांड के मामले में शिप्रा वाइन शॉप के शेखर की भूमिका को लेकर देवास पुलिस पड़ताल कर रही है। एक केस में शेखर को जमानत मिली थी, लेकिन पुलिस ने जेल से ही उसे सिविल लाइन थाने के प्रकरण में उठाया। पूछताछ के लिए उसे थाने ले जाया गया।
कुछ अन्य मामलों में केस दर्ज करने की बात कही जा रही है, लेकिन फिलहाल कोई भी पुलिस अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। सिविल लाइन टीआई विजय लोधी ने फोन नहीं उठाया। इसी तरह कलेक्टर नेहा मीना ने आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की रीशफलिंग की है और उनके कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। पूर्व में तीन आबकारी निरीक्षकों को निलंबित किया गया था।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित बहुत शातिर ढंग से शराब कारोबार संचालित करते थे। बड़वानी का निवासी पाटेंद्र जायसवाल है, लेकिन वहां की शराब दुकानों का लाइसेंसी मनीष जायसवाल है। इसी तरह टिमरनी की दुकान का लाइसेंस पाटेंद्र के नाम है, जहां राहुल जायसवाल रहता है। वे इंटरचेंज कर शराब दुकान चला रहे थे। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे आरोपितों की यही मंशा होगी कि पकड़े जाने पर वे लोकेशन की बात कहकर कोर्ट में अपना बचाव कर सकें।
दस्तावेजों से पता चला है कि टिमरनी की दुकान राहुल ने पाटेंद्र को किराए पर दे रखी है, जबकि पाटेंद्र यहां का लाइसेंसी है। एक तथ्य यह भी सामने आया है कि राहुल ने टिमरनी में जो पेट्रोल पंप खोला है, कागजों में वह जबलपुर निवासी आदिवासी महिला के नाम पर है। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या शराब के रुपयों से राहुल ने पंप खोला है। इसके लिए आयकर विभाग को पत्र लिखा जा रहा है।