
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास : वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संकट और क्लाइमेट चेंज की चिंताजनक खबरों के बीच देवास शहर की शंकरगढ़ पहाड़ी से एक सुखद और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। कभी अवैध उत्खनन की वजह से अपना अस्तित्व खो चुकी शंकरगढ़ पहाड़ी पर अब प्रकृति का पुनर्जन्म हो रहा है। पूर्व में तेंदुआ, लकड़बग्घा और अब हाल ही में इस पहाड़ी के वन क्षेत्र में एक जंगली बिल्ली को देखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट प्रतीक है कि यहां का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र तेज़ी से स्वस्थ हो रहा है।
ग्रीन आर्मी के समरजीत जाधव ने बताया कि शंकरगढ़ पहाड़ी को पुनर्जीवित करना एक दिन का काम नहीं था। पिछले सात वर्षों से लगातार देवास के युवाओं, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, वन विभाग के साथ पुलिस और प्रशासन ने इस पहाड़ी के संरक्षण और पौधारोपण के लिए काम किया है। जो पहाड़ी कभी अवैध उत्खनन के कारण पत्थरों का बंजर ढेर बन चुकी थी, आज वही पहाड़ी हरियाली की चादर ओढ़कर वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय स्थल बन रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी क्षेत्र में जंगली बिल्ली या अन्य मांसाहारी जीवों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि वहाँ खाद्य श्रृंखला और जैव-विविधता पुनः स्थापित हो रही है। यदि कोई वन्यजीव किसी स्थान को अपना ठिकाना बनाता है, तो इसका अर्थ है कि वहां उसके लिए पर्याप्त भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है।
शंकरगढ़ पहाड़ी पर जंगली बिल्ली का दिखना हम सभी के 7 साल के संघर्ष की जीत है। यह खबर साबित करती है कि हमारी प्रकृति दोबारा सांस ले रही है। हमारा लक्ष्य शंकरगढ़ पहाड़ी को इतना सुरक्षित और समृद्ध बनाना है कि यहां अन्य वन्यजीव भी स्वतंत्र रूप से फल-फूल सकें। - समरजीत जाधव, ग्रीन आर्मी देवास
यह क्षेत्र खनन का था, जहां धीरे-धीरे प्रकृति फिर से अपने पुराने रूप में लौट रही है। तेंदुआ व लकड़बग्घा जैसे जानवर भी हैं, जो प्रकृति के लिए काफी उत्साहजनक बात है। शंकरगढ़ पर जनसहयोग से ही पौधारोपण और संरक्षण के काम वर्षों से किए जा रहे हैं, जिससे एक खनन क्षेत्र से प्राकृतिक पर्यावास बनने का सफर उत्साहजनक है। - विकास माहोरे, एसडीओ वन, देवास