
नईदुनिया न्यूज, गंधवानी (धार) : मवेशी चराते हुए ग्वालबाल जंगल में आगे बढ़ रहे थे। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दूरी पर झाड़ियों में मादा तेंदुआ अपने तीन शावकों के साथ बैठी है। जैसे ही ग्वालबाल जंगल में झाड़ियों के पास पहुंचे, मादा तेंदुआ अचानक आक्रामक हो गई और 9 वर्षीय अश्विन पर हमला कर दिया।
अचानक हुए हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई। साथ मौजूद ग्वालबाल जोर-जोर से आवाज लगाते हुए भागे। उनके शोर से मादा तेंदुआ पीछे हट गई और अपने शावकों के पास लौट गई। हमले में अश्विन की पीठ पर तेंदुए के नाखून के पांच निशान दिखाई दे रहे हैं। घाव होने से मांस भी दिखाई दे रहा था। घायल बच्चे को तत्काल गंधवानी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे धार रेफर कर दिया गया। यहां एक निजी अस्पताल में उसका उपचार जारी है।
गंधवानी से करीब छह किमी दूर ग्राम बक्तला निवासी अश्विन रोज की तरह रविवार को मवेशी चराने के लिए गांव के पास जंगल में गया था। उसके साथ अन्य ग्वालबाल भी थे। मवेशियों को चराते हुए सभी जंगल में झाड़ियों के पास पहुंच गए। इसी जगह झाड़ियों में मादा तेंदुआ अपने तीन शावकों के साथ मौजूद थी। ग्वालबालों के नजदीक पहुंचते ही मादा तेंदुआ अचानक बाहर आई और अश्विन पर हमला कर दिया।
हमले के बाद अश्विन घायल होकर वहीं रह गया। उसकी पीठ पर तेंदुए के पंजों के पांच गहरे निशान दिखाई दे रहे हैं। घाव गंभीर होने के कारण वहां से मांस भी दिखाई दे रहा था। हमले के बाद साथ मौजूद ग्वालबाल घबरा गए और जोर-जोर से आवाज लगाने लगे। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके की ओर दौड़े। लोगों की आवाज सुनकर मादा तेंदुआ वहां से हट गई और अपने तीनों शावकों के पास लौट गई।
घटना की जानकारी ग्राम पंचायत सरपंच रमेश ने वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम जंगल में पहुंची और ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली। वन विभाग ने ग्रामीणों को मादा तेंदुए और उसके शावकों के आसपास नहीं जाने की समझाइश दी है। ग्रामीणों का कहना है कि मादा तेंदुआ अपने तीन बच्चों के साथ गांव के बिल्कुल नजदीक घूम रही है, जिससे कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तुरंत मौके पर पिंजरा लगाने और तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। घटना के बाद बक्तला और आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
ग्राम बक्तला के जंगल में खो बनी हुई हैं। ग्वालबाल मवेशी चराते हुए खो के पास चले गए थे, जहां मादा तेंदुआ मौजूद थी। इसी दौरान उसने चरवाहों पर हमला कर दिया। हमने गांव वालों को समझा दिया है कि अभी उस तरफ नहीं जाएं। मादा तेंदुए को अभी छेड़ना ठीक नहीं रहेगा। बच्चों के इलाज के लिए हमने वन कर्मचारी को धार भेजा है। -केसी बघेल, डिप्टी रेंजर, बाग
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