
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में चल रही सुनवाई इसी सप्ताह पूरी हो सकती है। कोर्ट छह अप्रैल से इस मामले में लगातार सुनवाई कर रही है। अब तक याचिकाकर्ता और प्रतिवादी अपनी-अपनी बात कोर्ट के सामने रख चुके हैं।
इन सभी के तर्क सुनने के बाद अब कोर्ट इनके प्रतिउत्तर सुन रही है। दो याचिकाकर्ताओं ने अपने प्रति उत्तर दे दिए हैं। सोमवार को मुस्लिम पक्ष को अपनी बात रखना है। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक पक्ष को अधिकतम 30 मिनट में अपनी बात पूरी करनी है।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों से लिखित में तर्क प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है। ऐसी संभावना है कि कोर्ट 16 मई से शुरू होने वाले ग्रीष्मावकाश से पहले भोजशाला मामले में सुनवाई पूरी कर ले। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद पैरवी कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्हें अपना प्रतिउत्तर देना था, लेकिन नहीं दे सके। वह सोमवार को अपनी बात रखेंगे। इसी के साथ कोर्ट अपीलार्थी काजी जकुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के प्रतिउत्तर भी प्रस्तुत करेंगी।
इसके पहले हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से एडवोकेट विष्णुशंकर जैन और याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से एडवोकेट मनीष गुप्ता अपने प्रतिउत्तर में मस्जिद पक्ष के उस तर्क को खारिज कर चुके हैं, जिसमें कहा था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत मुस्लिम पक्ष को भोजशाला में नमाज का अधिकार है। जैन और गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है और इस श्रेणी की धरोहरों पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू ही नहीं होता है।
अधिवक्ताओं ने कोर्ट को यह भी बताया था कि किसी भी मस्जिद में वजूखाना, मीनार और मेहराब अनिवार्य रूप से होती हैं। इनके बगैर मस्जिद की कल्पना नहीं की जा सकती; भोजशाला में न वजूखाना है न मीनार। एएसआई की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि यहां मेहराब भी बाद में बनाई गईं। ऐसे में स्पष्ट है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं। याचिकाकर्ताओं को यहां 24 घंटे पूजा का अधिकार दिया जाए और नमाज पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।
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