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नर्मदा बैकवाटर ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, कोटेश्वर धाम के गर्भगृह डूबे, चिखल्दा में जलस्तर 134.80 मीटर पहुंचा

धार जिले में नर्मदा बैकवाटर के बढ़ते जलस्तर ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे प्रसिद्ध कोटेश्वर धाम के गर्भगृह जलमग्न हो गए हैं। जानिए सरद...और पढ़ें

By Rais MohammadEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 06:45:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 07:37:36 PM (IST)
नर्मदा बैकवाटर ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, कोटेश्वर धाम के गर्भगृह डूबे, चिखल्दा में जलस्तर 134.80 मीटर पहुंचा
धार जिले में नर्मदा बैकवाटर का जलस्तर बढ़ने से जलमग्न हुआ प्रसिद्ध कोटेश्वर धाम का मंदिर। (फाइल फोटो)

नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। धार जिले के नर्मदा तटीय डूब क्षेत्र में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात गंभीर हो गए हैं। बुधवार सुबह चिखल्दा के पास नर्मदा का जलस्तर 134.80 मीटर दर्ज किया गया। सरदार सरोवर बांध के गेट बंद किए जाने के बाद से यह पिछले 10 साल में इस क्षेत्र में दर्ज किया गया सर्वाधिक जलस्तर है। लगातार बढ़ते बैकवाटर (Backwater) के कारण प्रसिद्ध कोटेश्वर तीर्थ के प्राचीन मंदिरों के गर्भगृह जलमग्न हो चुके हैं। इसके अलावा, कोटेश्वर के समीप कोठड़ा में स्थित नवीन मां नर्मदा कोटेश्वर घाट के छह में से चार चबूतरे भी पानी में डूब गए हैं।

15 दिनों में 3.40 मीटर बढ़ा जलस्तर

पिछले 15 दिनों में ही नर्मदा के जलस्तर में लगभग 3.40 मीटर का उछाल आया है। 3 अगस्त को जलस्तर 131.40 मीटर था, जो बढ़कर 134.80 मीटर हो गया है। पिछले वर्ष 19 अगस्त को जलस्तर 131.25 मीटर था। क्षेत्र के कैचमेंट एरिया में फिलहाल तेज बारिश न होने के बावजूद बैकवाटर के कारण जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सरदार सरोवर बांध का पूर्ण जलस्तर 138.68 मीटर है, जबकि बुधवार को यह 135.15 मीटर तक पहुंच गया। बांध अब अपनी क्षमता से केवल 3.53 मीटर ही खाली है।


बरगी और ओंकारेश्वर बांध से छोड़ा जा रहा पानी

ऊपरी बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण डूब क्षेत्र में जलस्तर और तेजी से बढ़ने की आशंका है। मंगलवार दोपहर ऊपरी हिस्से में स्थित बरगी बांध के 9 गेट 0.75 मीटर खोलकर पानी छोड़ा गया, जो इंदिरा सागर बांध की ओर बढ़ रहा है।

मंगलवार को इंदिरा सागर का जलस्तर 255.96 मीटर दर्ज किया गया (कुल क्षमता: 262.13 मीटर)। वहीं, ओंकारेश्वर बांध अपने फुल रिजर्वॉयर लेवल (194.56 मीटर) पर है। यहां की एक टर्बाइन चलाकर 237 क्यूमेक प्रति सेकेंड पानी नर्मदा में छोड़ा जा रहा है।

डूब क्षेत्र में बढ़ी चिंता

यदि ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर बांधों से पानी की निकासी बढ़ाई जाती है और सरदार सरोवर बांध से मुख्य डिस्चार्ज नहीं होता, तो तटीय इलाकों में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है। सरदार सरोवर के फुल लेवल के बेहद करीब पहुंचने से स्थानीय प्रशासन और तटीय ग्रामीणों में हड़कंप है।

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