बस में 46 बच्चों की जान बचाकर ड्राइवर ने तोड़ा दम, धार में तबीयत बिगड़ते ही चालक ने दिखाई सूझबूझ
महेश मेमोरियल स्कूल बाग की बस सोमवार को 46 बच्चों को लेकर जोबट जा रही थी। इसी दौरान झिरपन्या के पास अचानक बस चालक 57 वर्षीय कन्हैयालाल बघेल की तबीयत ब...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 08 Sep 2026 05:50:46 PM (IST)Updated Date: Tue, 08 Sep 2026 05:50:46 PM (IST)
बस चालक कन्हैयालाल बघेल, जिन्होंने तबीयत बिगड़ने के बावजूद सूझबूझ दिखाते हुए बस रोककर 46 बच्चों को सुरक्षित बचाया। (एआई इमेज)HighLights
- तबीयत बिगड़ने पर ड्राइवर ने बस सड़क किनारे रोकी
- कुछ देर बाद अस्पताल में हुई मौत; शोक में स्कूल बंद
- सतर्कता से बस में सवार 46 बच्चों की जान बच गई
नईदुनिया न्यूज, बाग : महेश मेमोरियल स्कूल बाग की बस सोमवार को 46 बच्चों को लेकर जोबट जा रही थी। इसी दौरान झिरपन्या के पास अचानक बस चालक 57 वर्षीय कन्हैयालाल बघेल की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें घबराहट की शिकायत हुई।
स्थिति को भांपते हुए उन्होंने सूझबूझ दिखाई और चलती बस को तत्काल सड़क किनारे सुरक्षित खड़ा कर दिया। उनकी इस सतर्कता से बस में सवार 46 बच्चों की जान जोखिम में पड़ने से बच गई। हालांकि कुछ देर बाद अस्पताल में कन्हैयालाल ने दम तोड़ दिया।
कन्हैयालाल बघेल ग्राम देंगाव भीलखेड़ी तहसील जोबट के निवासी थे और महेश मेमोरियल स्कूल की बस चला रहे थे। स्कूल प्राचार्य सुरेंद्रसिंह चौहान के अनुसार सोमवार को दिनभर कन्हैयालाल सामान्य थे। दोपहर करीब ढाई बजे भी उन्होंने स्कूल स्टाफ से बातचीत की थी। शाम को बच्चों को लेकर बस झिरपन्या के पास पहुंची, तभी अचानक उन्हें उल्टी जैसा महसूस हुआ।
बस रोककर बच्चों को सुरक्षित किया
तबीयत बिगड़ने पर कन्हैयालाल ने सबसे पहले बस को सड़क किनारे लगाया और उल्टी की। इसके बाद वे बस चलाने की स्थिति में नहीं थे। कंडक्टर ने उन्हें ड्राइवर सीट से हटाकर कंडक्टर सीट पर बैठाया और तत्काल स्कूल प्रबंधन को सूचना दी। सूचना मिलते ही स्कूल प्रबंधन मौके पर पहुंचा।
झिरपन्या में मौजूद एक अन्य चालक को भी बुलाया गया। उसने तत्काल बच्चों से भरी बस की कमान संभाली और सभी बच्चों को सुरक्षित रूप से जोबट अस्पताल पहुंचाया। वहीं कन्हैयालाल को भी बस में कंडक्टर की सीट पर बैठाकर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अंतिम समय तक बच्चों की सुरक्षा का रखा ध्यान
प्राचार्य सुरेंद्रसिंह चौहान ने बताया कि कन्हैयालाल ने अंतिम समय में भी बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। चलती बस में अचानक तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने बिना घबराए बस को तत्काल सड़क किनारे रोक दिया। यदि उन्होंने समय रहते बस नहीं रोकी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
बस में छोटे बच्चों से लेकर कक्षा 12वीं तक के कुल 46 बच्चे सवार थे। चालक की सूझबूझ से सभी बच्चे सुरक्षित रहे, लेकिन बच्चों की जान बचाने वाले कन्हैयालाल खुद जिंदगी की जंग हार गए। घटना के बाद विद्यालय परिवार में शोक की लहर है। शोक स्वरूप विद्यालय में मंगलवार को अवकाश रखा गया।