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धार में सातवीं बार नर्मदा के बैकवाटर में डूबा कोटेश्वर तीर्थ, शिखरों से दिख रही सरकारी बेरुखी

नर्मदा का जलस्तर बढ़ा तो एक बार फिर इतिहास और आस्था का तीर्थ कोटेश्वर पानी में समा गया। सरदार सरोवर बांध के गेट लगने के बाद दस वर्षों में ये सातवीं बा...और पढ़ें

By PremVijay PatilEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 06:07:46 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 07:32:41 PM (IST)
धार में सातवीं बार नर्मदा के बैकवाटर में डूबा कोटेश्वर तीर्थ, शिखरों से दिख रही सरकारी बेरुखी
नर्मदा किनारे प्राचीन तीर्थ कोटेश्वर में नर्मदा मंदिर, कोटेश्वर महादेव मंदिर और श्री राम मंदिर के शिखर नजर आ रहे है बाकी तीर्थ नर्मदा में जलमग्न हो चुका है।-नईदुनिया

HighLights

  1. 25 साल से सरकारी खाते में मुआवजा, हर बार पानी में डूब रहा कोटेश्वर
  2. 138.68 मीटर पहुंचा सरदार सरोवर का जलस्तर
  3. चार बार बनी विस्थापन की फाइल, समाधान अब तक नहीं

शैलेंद्र लड्डा, नईदुनिया, सुसारी (धार) : नर्मदा का जलस्तर बढ़ा तो एक बार फिर इतिहास और आस्था का तीर्थ कोटेश्वर पानी में समा गया। सरदार सरोवर बांध के गेट लगने के बाद दस वर्षों में ये सातवीं बार है, जब बैकवाटर ने पूरे तीर्थ को अपने आगोश में लिया है।

बांध का जलस्तर 138.68 मीटर पहुंचने के बाद अब यहां सिर्फ कोटेश्वर महादेव, मां नर्मदा और श्रीराम मंदिर के शिखर दिखाई दे रहे हैं। विडंबना ये है कि जिन मंदिरों के विस्थापन के लिए 25 साल पहले करीब 23 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ था, वह राशि आज भी सरकारी खाते में पड़ी है। चार बार फाइलें बनीं, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकला।


एक नजर में कोटेश्वर तीर्थ

  • सातवीं बार जलमग्न : सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर से वर्ष 2017 के बाद अब तक सात बार कोटेश्वर तीर्थ जलमग्न हो चुका है।
  • सिर्फ शिखर नजर आ रहे : बांध का जलस्तर 138.68 मीटर पहुंचने पर तीर्थ के अधिकांश मंदिर पानी में डूब जाते हैं। वर्तमान में तीन प्राचीन मंदिरों के शिखर ही दिखाई दे रहे हैं।
  • 131 मीटर से शुरु होता है असर : कोटेश्वर तीर्थ क्षेत्र में करीब 131 मीटर जलस्तर पहुंचने के बाद बैकवाटर भरना शुरू हो जाता है। जलस्तर बढ़ने के साथ मंदिरों को नुकसान पहुंचता है।
  • 25 साल से अटका मुआवजा : मंदिरों के विस्थापन का करीब 23 लाख रुपए मुआवजा 25 साल से सरकारी खाते में पड़ा है। ब्याज सहित यह राशि अब करोड़ों में पहुंचने की बात कही जा रही है।
  • चार फाइलें, समाधान शून्य : विस्थापन को लेकर अब तक चार बार फाइलें तैयार की जा चुकी हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर अंतिम समाधान नहीं निकल सका।
  • धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व : नर्मदा पुराण के अनुसार कुबेर के पुत्र ने यहां तपस्या कर कोटेश्वर महादेव की स्थापना की थी। होलकर महारानी अहिल्याबाई ने प्राचीन घाट का निर्माण कराया था।
  • धरोहर पर लगातार खतरा : डूब क्षेत्र में आने के कारण हर साल बैकवाटर से मंदिरों को नुकसान हो रहा है। सवाल ये है कि सरकारी फाइलों में सुरक्षित मुआवजा कब मंदिरों के संरक्षण के काम आएगा।
  • कोटेश्वर तीर्थ पर आने-जाने का रास्ता बैकवाटर का लेवल 130 मीटर आने पर बंद हो जाता है।
  • जब भी कोटेश्वर तीर्थ बैकवाटर में डूबता है, तो 5 से 7 माह तक डूबा रहता है।
  • कोटेश्वर तीर्थ का प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर साल 2025 में बैकवाटर से ढह गया है।
  • कोटेश्वर तीर्थ पर कोटेश्वर महादेव मंदिर, नर्मदा मंदिर और श्रीराम मंदिर प्राचीन पत्थरों से बने होने के कारण 7 साल से डूबने के बाद भी अभी तक टिके हुए हैं।

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