धामनोद (नईदुनिया न्यूज)। अक्सर देखने में आया है कि क्षेत्र में बड़ी सड़क दुर्घटनाओं के बाद प्रशासन जागता है और आनन-फानन में नए नियम बना देता है। समय रहते ही यदि इस दिशा में ध्यान दिया जाए, तो दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। नगर सहित क्षेत्र में तीन व चार पहिया वाहन संचालक सवारियां लाने व ले जाने के लिए किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरटीओ द्वारा टैक्सियों व मैजिक वाहनों को सवारियां बैठाने की अनुमति प्रदान हो, किंतु इन वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी बिठाकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

क्षेत्र में आवागमन करने वाले कई टैक्सी वाहन बिना परमिट संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में सरकार को हर महीनों हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। यदि कभी कोई हादसा हो गया, तो इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हो पाएगी। नगर में ही करीब दो दर्जन से अधिक वाहन बिना परमिट के चल रहे हैं। आटो व मैजिक वाहन चालकों में 20 से अधिक लोग छतों पर सवार होकर गुजर रहे हैं, जो हादसों को खुला निमंत्रण देते नजर आ रहे हैं।

विरोध करने पर मांगते हैं दोगुना किराया

जानकारी के अनुसार टैक्सी व मैजिक वाहन वाले यात्रियों के गांवों से नगर तक के 20 से 30 रुपये किराया लेते हैं, लेकिन जब बैठी हुई सवारी सुविधा के लिए वाहन में भीड़ कम करने को कहती हैं, तो वे दोगुना किराए की मांग करते हैं। इसलिए भी यात्री ओवरलोडिंग का ज्यादा विरोध नहीं करती। गांवों के लिए अन्य दूसरे वाहनों का संचालन नहीं होता है। इस कारण मजबूरी में भीड़ में जाना ग्रामीणों की मजबूरी हो जाता है। इस मजबूरी में उन्हें जान का जोखिम उठाकर सफर करना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक चलन

नगर में संचालित गांवों के लिए चलने वाले सवारी वाहनों में कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिलता है, जहां पर वैन, मैजिक, टेंपो, टैक्सी सहित अन्य छोटे वाहन ग्रामीणों व मजदूरों को ठूंस-ठूंसकर बैठाते हैं। ये वाहन खुलेआम नगर से गांवों में जा रहे हैं। इनमें अधिकांश निजी वाहन हैं। ये वाहन इतने अधिक ओवरलोडिंग होते हैं कि छोटी-सी भी चूके होने पर दुर्घटना होने की संभावना रहती है। ये वाहन अधिकारियों के सामने से ही गुजर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इधर, नाबालिग मजदूरों को ठसाठस बैठाकर रोज निकल रहे पिकअप वाहन

मनावर। क्षेत्र के मजदूरों को पिकअप वाहन में ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। इन मजदूरों को खेतों में काम करने के लिए ले जाया जाता है। इनमें नाबालिग बच्चे भी शामिल होते हैं। प्रतिदिन मजदूरों से भरे ओवरलोडिंग वाहन बिना किसी रोक-टोक के नजर आते हैं। पिकअप में भरे हुए मजदूर युवक-युवतियों की संख्या लगभग 70 से 80 तक रहती है। अधिकांश नाबालिग मजदूर पिकअप वाहन के पीछे लटककर जाते हैं। यदि किसी दिन पिकअप के पलटने से दुर्घटना हो गई, तो मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ सकती है।

रविवार को डही क्षेत्र में मजदूरों से भरी पिकअप दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें ठंसा-ठंस भरे हुए कई मजदूर घायल हो गए थे। इस दुर्घटना से भी सबक नहीं लिया जा रहा है। इस ओर आरटीओ और पुलिस प्रशासन का भी ध्यान नहीं है। मनावर से प्रतिदिन चार-पांच व सिंघाना से 10 से 12 पिकअप वाहन सुबह-शाम मजदूरों से भरे हुए निकलते हैं। इसमें नाबालिग युवक-युवतियां लटककर जाते हैं। जबकि चाइल्ड लाइन जैसी संस्था ने भी अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है। इस संबंध में थाना प्रभारी ब्रजेश मालवीय ने बताया कि ओवरलोड वाहनों पर चालानी कार्रवाई करते हैं। कई पिकअप वाहन मनावर की बजाए अन्य रास्तों से निकल जाते हैं। हमने किसानों को भी समझाइश दी है कि वे नाबालिग बच्चों को मजदूरी पर नहीं लगाए।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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