
नईदुनिया न्यूज, बदनावर (धार) : सड़क पर निकला व्यक्ति घर सुरक्षित लौटेगा, यही उम्मीद हर परिवार को रहती है। कोई काम पर जाता है, कोई पढ़ने, तो कोई परिवार की जरूरतें पूरी करने। घर पर उनके लौटने का इंतजार होता है, लेकिन जब दरवाजे पर दस्तक की जगह हादसे की खबर पहुंचती है, तो एक पल में पूरा परिवार बिखर जाता है।
कहीं एक ही परिवार के तीन सदस्य जान गंवा देते हैं, तो कहीं घर का इकलौता चिराग बुझ जाता है। बदनावर क्षेत्र में तीन से 19 अक्टूबर के बीच आठ लोगों की मौत और नौ लोगों के घायल होने की घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी बदल देने वाली त्रासदियां हैं।
सवाल यह है कि आखिर इन हादसों को रोका क्यों नहीं जा पा रहा हैं? सड़कें बेहतर हो रही हैं, फोरलेन और टू-लेन मार्गों पर सफर आसान हुआ है, लेकिन तेज रफ्तार और लापरवाही ने इसी सफर को जोखिम भरा बना दिया है। उज्जैन-बदनावर फोरलेन हो, लेबड़-नयागांव फोरलेन या बदनावर-थांदला मार्ग, दुर्घटनाओं का खतरा चिंता बढ़ा रहा है। मृतकों में युवाओं की अधिक संख्या बताती है कि परिवारों का भविष्य संवारने वाली उम्र में ही कई जिंदगियां असमय खत्म हो रही हैं।
तीन से 19 अक्टूबर के बीच सामने आई दुर्घटनाओं में मृतकों की उम्र करीब 10 से 45 वर्ष के बीच रही। बाइक सवार विशेष रूप से हादसों की चपेट में आ रहे हैं। कई घटनाओं में अज्ञात वाहन टक्कर मारकर निकल गए, जबकि कुछ हादसे दोपहिया वाहनों की भिड़ंत और ट्रैक्टर से जुड़े रहे। हर घटना के कारणों की अलग-अलग जांच जरूरी है, लेकिन तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी ऐसे खतरे हैं, जिन्हें समय रहते रोका जा सकता है। हर दुर्घटना के बाद शोक जताने से बिछुड़े लोग लौटकर नहीं आते।
चौड़ी सड़क देखकर चालक अक्सर गति सीमा भूल जाते हैं। जहां 60 किमी प्रति घंटे की गति निर्धारित है, वहां वाहन 80 से 120 किमी प्रति घंटे तक दौड़ने की बात सामने आती है। इतनी तेज रफ्तार में वाहन पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है और अचानक सामने आए व्यक्ति या वाहन से बचने का मौका भी कम हो जाता है। सवाल केवल यह नहीं कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि यह भी है कि उसे रोकने के लिए पहले क्या किया गया था। सड़क पर रफ्तार भले ही वाहन की हो, लेकिन उसके परिणाम पूरे परिवार को भुगतने पड़ते हैं।
सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता अभियान जरूरी हैं, लेकिन उनका असर तभी दिखेगा जब लोग नियमों का पालन करे और जिम्मेदार विभाग भी अपनी भूमिका निभाए। गति सीमा तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो। दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, पर्याप्त रोशनी और जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। जहां बार-बार हादसे होते हैं, वहां कारणों की पहचान कर स्थायी सुधार हो। हादसे के बाद जांच करने से अधिक जरूरी है कि पहले ही खतरे दूर किए जाए।