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आश्वासन की नाव पर दस साल से सवार डूब प्रभावित, सरदार सरोवर का जलस्तर पूर्ण होते ही धार में 5 गांवों के 700 परिवारों की बढ़ीं मुश्किलें

नर्मदा पर गुजरात में बने सरदार सरोवर बांध के गेट बंद हुए एक दशक बीत चुका है। इन दस वर्षों में बांध सात बार अपने पूर्ण जलस्तर 138.68 मीटर तक पहुंच चुका...और पढ़ें

By Rais MohammadEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 04:57:43 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 04:57:43 PM (IST)
आश्वासन की नाव पर दस साल से सवार डूब प्रभावित, सरदार सरोवर का जलस्तर पूर्ण होते ही धार में 5 गांवों के 700 परिवारों की बढ़ीं मुश्किलें
निसरपुर डूब के गांव में आज भी परिवार रहने को मजबूर हैं। उन्हें पुनर्वास पैकेज और कुछ परिवारों को पुनर्वास स्थलों पर भूखंड नहीं दिए गए हैं। -नईदुनिया

HighLights

  1. निसरपुर में फिर दहलीज तक पहुंचा बैकवाटर
  2. हर बार बैकवाटर के साथ डूब प्रभावितों की परेशानी भी सतह पर आती है
  3. पानी उतरते ही उनकी समस्या फिर फाइलों में चली जाती है

शैलेंद्र लड्ढा, नईदुनिया, निसरपुर (धार) : नर्मदा पर गुजरात में बने सरदार सरोवर बांध के गेट बंद हुए एक दशक बीत चुका है। इन दस वर्षों में बांध सात बार अपने पूर्ण जलस्तर 138.68 मीटर तक पहुंच चुका है। हर बार बैकवाटर के साथ निसरपुर क्षेत्र के डूब प्रभावित परिवारों की परेशानी भी सतह पर आती है, लेकिन पानी उतरते ही उनकी समस्या फिर फाइलों में चली जाती है।

शनिवार को बांध पूर्ण जलस्तर पर पहुंचा तो डूब से बाहर घोषित निसरपुर, खेड़ा बस्ती, करौंदिया, मलवाड़ा और बोधवाड़ा में करीब 700 परिवारों के घरों की दहलीज तक बैकवाटर पहुंच गया। रास्ते बंद हैं और मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हैं। दस साल में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों की नाव तो चलती रही, लेकिन इन परिवारों को अब तक स्थायी समाधान का किनारा नहीं मिला।


निसरपुर की तीन बस्तियों में करीब 400, खेड़ा बस्ती में 85, करौंदिया में 40 तथा मलवाड़ा-बोधवाड़ा में 75 से अधिक परिवार अब भी पुराने गांवों में रहने को मजबूर हैं। एनवीडीए के आकलन में जिन परिवारों के घर पूर्ण डूब स्तर से महज 0.10 मीटर से एक मीटर तक ऊपर हैं, उन्हें डूब क्षेत्र से बाहर माना गया। जमीन पर पानी पहुंचने के बाद यही तकनीकी अंतर परिवारों के लिए परेशानी बन रहा है।

न डूब में, न सुविधाओं में

स्थिति यह है कि इन परिवारों को पूरी तरह डूब प्रभावित मानकर सुविधाएं नहीं मिल रहीं और डूब से बाहर होने के कारण सामान्य गांवों जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। यानी सरकारी व्यवस्था के बीच परिवारों की स्थिति ‘न घर के, न घाट के’ जैसी हो गई है।

2023 में पूर्ण जलस्तर से दो मीटर ऊपर पहुंचा था पानी

वर्ष 2023 में बैकवाटर पूर्ण जलस्तर 138.68 मीटर से करीब दो मीटर ऊपर तक पहुंच चुका है। एक अक्टूबर को भी पानी पूर्ण जलस्तर से करीब 0.20 मीटर ऊपर प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने की बात सामने आई।

पुनर्वास पैकेज भी फाइलों में

एनवीडीए ने दो वर्ष पहले निसरपुर के 286, चिखलदा खेड़ा बस्ती के 36, बोधवाड़ा-मलवाड़ा के 23 और करौंदिया के चार परिवारों को 5.80 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज के लिए प्रस्तावित किया था। इसके बावजूद आज तक इसका निराकरण नहीं हो सका।

अधिकारी बदले, समस्या जस की तस

डूब के दस वर्षों में आठ जिला कलेक्टर और 12 एसडीएम बदल चुके हैं। अधिकारी बदलते रहे, आश्वासन मिलते रहे, लेकिन बैकवाटर से प्रभावित परिवारों की स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया।

हर साल पानी बढ़ता है, सवाल भी

बांध का जलस्तर बढ़ते ही रास्ते और घरों तक पानी पहुंच जाता है। सवाल यह है कि जब पिछले दस वर्षों में समस्या बार-बार सामने आ रही है तो स्थायी समाधान के लिए अब तक निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाया गया।

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