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यूनेस्को की अस्थायी सूची में धार स्थित बाग की गुफाएं, विश्व धरोहर बनने की दिशा में बढ़ा कदम

धार जिले के बाग की ऐतिहासिक बाग गुफाओं की चित्रकला को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (अस्थायी सूची) में शामिल किया गया है। इससे बाग गुफाओं को विश्व धरोहर ...और पढ़ें

By Rais MohammadEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 07:27:06 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 07:27:06 PM (IST)
यूनेस्को की अस्थायी सूची में धार स्थित बाग की गुफाएं, विश्व धरोहर बनने की दिशा में बढ़ा कदम
बाग के संग्रहालय में स्थापित बोधिसत्व पद्मपाणी का भित्तिचित्र। -नईदुनिया

HighLights

  1. 1990 में नईदुनिया ने उठाई थी बाग के भित्तिचित्रों को बचाने की आवाज
  2. अब यूनेस्को तक पहुंची ऐतिहासिक विरासत
  3. अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर मजबूत होगी बाग की पहचान

जय तापड़िया, नईदुनिया न्यूज, बाग (धार) : धार जिले के बाग की ऐतिहासिक बाग गुफाओं की चित्रकला को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (अस्थायी सूची) में शामिल किया गया है। इससे बाग गुफाओं को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बाग गुफाओं का संभावित सूची में शामिल होना प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाग की पहचान और पर्यटन की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।

बाग गुफाएं पांचवीं सदी की नौ बौद्ध गुफाओं का समूह हैं, जिन्हें चट्टानों को काटकर बनाया गया है। इनमें गुफा क्रमांक दो, तीन और चार की दीवारों, छतों और स्तंभों पर बड़ी संख्या में भित्तिचित्र बनाए गए थे। विशेष रूप से गुफा क्रमांक चार, जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, अपनी भित्तिचित्र कला के लिए प्रसिद्ध है।


इन चित्रों में शाही दरबार, जुलूस, संगीतकार और तत्कालीन सामाजिक जीवन के विविध दृश्य उकेरे गए हैं। इनकी चित्रकला अजंता की परंपरा से जुड़ी होने के साथ ही अपनी अलग क्षेत्रीय विशेषता भी प्रस्तुत करती है।

नमी से बचाने के लिए हटाए गए थे भित्तिचित्र

समय के साथ गुफाओं में बढ़ती आद्रता से भित्तिचित्रों को नुकसान पहुंचने का खतरा था। इसे देखते हुए वर्ष 1990 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रसायन शाखा ने गुफाओं से भित्तिचित्रों को सुरक्षित रूप से हटाने का कार्य शुरू किया। दीवार, छत और स्तंभों से इन मनोहारी कलाकृतियों को हटाकर सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में वर्षों का समय लगा। इसके बाद पर्यटकों को इन कलाकृतियों से परिचित कराने के लिए संग्रहालय का निर्माण और भित्तिचित्रों की स्थापना की गई।

18 साल बाद संग्रहालय में पहुंची मनोहारी कलाकृतियां

भित्तिचित्रों को गुफाओं से हटाए जाने के बाद करीब 18 वर्ष तक इन्हें पर्यटकों के सामने प्रदर्शित करने की व्यवस्था पूरी तरह आकार नहीं ले सकी। संग्रहालय तैयार होने के बावजूद उसके संचालन और उद्घाटन में देरी हुई। नईदुनिया ने इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाते हुए संग्रहालय शुरू करने की मांग की।

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से भी लगातार संपर्क किया गया। करीब पांच वर्ष तक संग्रहालय के उद्घाटन का इंतजार चलता रहा और भवन पर ताला लगा रहा। लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार दो फरवरी 2008 को संग्रहालय का उद्घाटन हुआ और पर्यटकों को इन दुर्लभ कलाकृतियों के दीदार का अवसर मिला।

विश्व धरोहर का दर्जा मिला तो बढ़ेगा पर्यटन

यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना किसी स्थल को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया का प्रारंभिक महत्वपूर्ण चरण है। विश्व धरोहर का दर्जा उन सांस्कृतिक, प्राकृतिक या मिश्रित स्थलों को दिया जाता है, जिनका असाधारण सार्वभौमिक महत्व माना जाता है।

इसका उद्देश्य ऐसे स्थलों का संरक्षण करना और उन्हें भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। बाग गुफाओं की वैश्विक पहचान मजबूत होने से क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नए अवसर मिलने की उम्मीद है। अब बाग क्षेत्र के लोगों की नजर आगे की प्रक्रिया पर है, ताकि विश्वस्तरीय पहचान की दिशा में बढ़े इस कदम का लाभ क्षेत्र को स्थायी रूप से मिल सके।

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