
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार : भोजशाला सत्याग्रह स्थल पर रविवार को जूना अखाड़ा, बड़ा हनुमान घाट वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष सभापति श्री महंत प्रेमगिरि जी महाराज ने कहा कि भोजशाला सनातन परंपरा और हिंदू समाज की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। जब तक भोजशाला में मां वाग्देवी की स्थापना नहीं होती और हिंदू समाज को सम्मान नहीं मिलता, तब तक वे इसके लिए तत्पर रहेंगे और संत समाज भी समर्पित रहेगा।
उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार 11वीं शताब्दी में महाराजा भोज ने यहां संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की थी। ये संस्कृत अध्ययन और मां सरस्वती की आराधना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। भोजशाला में हवनकुंड, मंडप, स्तंभों पर हिंदू संस्कृति से जुड़ी आकृतियां और संस्कृत में शिलालेख होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान देवी-देवताओं से संबंधित विग्रह और सनातन धर्म के प्रतीक मिलने की बात सामने आई है।
समिति के अनुसार सर्वे 98 दिन चला था। महंत ने कहा कि भोजशाला की बनावट मंदिर जैसी है और यहां मस्जिद होने का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज भोजशाला को पूर्ण रूप से पूजा-अर्चना के स्थल के रूप में चाहता है तथा परिसर में नमाज के लिए उपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस अवसर पर संयोजक गोपाल शर्मा ने महंत एवं संतों को भोजशाला के विभिन्न हिस्सों के दर्शन कराए तथा इतिहास की जानकारी दी। संतों ने ज्योति मंदिर में अखंड ज्योति के दर्शन किए। समिति की ओर से उनका शाल-श्रीफल से सम्मान किया गया। इस दौरान समिति अध्यक्ष सुरेश जलोदिया, महाप्रबंधक हेमंत दोराया, महामंत्री सुमित चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी, सदस्य, मातृशक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे। जानकारी समिति मीडिया प्रमुख मोहन राठौर ने दी।
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