
नईदुनिया प्रतिनिधि, बदनावर। गर्मी अभी दूर है, लेकिन गांवों में पानी की चिंता ने समय से पहले दस्तक दे दी है। मानसून की बेरुखी से जलस्रोत पर्याप्त नहीं भर पाए और भूजल स्तर गिरने से पेयजल व्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है। सरकारी आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं।
बदनावर विकासखंड की 89 ग्राम पंचायतों में से 43 पंचायतों के 72 गांवों की 126 बसाहटों में पेयजल संकट की संभावना है। सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा के बीच प्रशासन वैकल्पिक इंतजामों की तैयारी कर रहा है। सवाल यह है कि जिन गांवों में अभी से नल-जल योजनाएं बंद हैं और सैकड़ों हैंडपंप खराब पड़े हैं, वहां जरूरत बढ़ने पर पानी कैसे पहुंचेगा।
बदनावर तहसील में 165 गांव और 401 बसाहटें हैं। इनमें 100 गांवों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की नल-जल योजनाओं से पानी पहुंचता है, जबकि 37 गांव राजोद और 28 गांव माही समूह जलप्रदाय योजना के दायरे में हैं। तीन योजनाएं, 34 तालाब और बैराज के बावजूद संकट की आशंका इसलिए बनी हुई है, क्योंकि कई योजनाएं बंद हैं, कुछ में सुधार कार्य चल रहा है और माही योजना का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है।
पीएचई विभाग की 100 नल-जल योजनाओं में से 84 ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित हो चुकी हैं। शासन की नीति के अनुसार इनके संचालन और संधारण की जिम्मेदारी अब पंचायतों की है, लेकिन हस्तांतरण के बाद भी सात गांवों बामंदाकला, तारोद, पाना, पड़ुनिया, नागौरा, रतनपुरा और रिटोड़ी में नल-जल योजनाएं बंद हैं।
इन्हें चालू करने के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग से प्राक्कलन तैयार कराए जा रहे हैं। शेष 16 योजनाओं में पंचायतों की मांग अनुसार ठेकेदारों से सुधार कार्य करवाए जा रहे हैं। ऐसे में इन योजनाओं से समय पर जलप्रदाय शुरू होना संकट से निपटने के लिए जरूरी है।
जल जीवन मिशन के तहत राजोद समूह जलप्रदाय योजना से 37 गांवों को शुद्ध पेयजल मिलना है। जिन बसाहटों तक पानी नहीं पहुंच रहा, वहां जल निगम के अधिकारियों को सुधार कर तत्काल जलप्रदाय शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर रतलाम-धार क्षेत्र की माही समूह जलप्रदाय योजना निर्माणाधीन है। इससे बदनावर के 28 गांवों को पानी मिलना है, लेकिन काम अधूरा होने से चालू वित्तीय वर्ष में भी जलप्रदाय शुरू नहीं हो सकेगा। इन गांवों को फिलहाल स्थानीय जलस्रोतों के भरोसे रहना होगा।
ग्रामीणों के लिए पेयजल का प्रमुख सहारा हैंडपंप भी राहत देने की स्थिति में नहीं हैं। तहसील क्षेत्र में करीब 2400 हैंडपंप हैं, जिनमें 500 से अधिक बंद पड़े हैं। अल्पवर्षा के कारण भूजल स्तर और गिरा तो चालू हैंडपंपों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
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पीएचई विभाग के एसडीओ शैलेंद्र वाखला ने बताया कि नए नलकूप खनन, सिंगल फेस मोटर पंप लगाने, हाइड्रोफ्रैक्चरिंग और हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने जैसे काम प्रस्तावित किए हैं, ताकि बंद या कम पानी देने वाले स्रोतों को फिर उपयोगी बनाया जा सके।
किसी गांव की नल-जल योजना का जलस्रोत सूखने पर संबंधित ग्राम पंचायत के पांच निजी जलस्रोतों जैसे नलकूप और कुओं का अधिग्रहण कर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए विभागीय और पंचायत स्तर पर तैयारी की जा रही है। हालांकि यह इंतजाम तभी कारगर होगा, जब निजी जलस्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहे और जरूरत के समय आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
पेयजल योजनाओं का संचालन बिजली के अभाव में न रुके, इसके लिए एसडीएम प्रियंका मिमरोट ने निर्देश दिए हैं कि बकाया बिजली बिल के कारण नल-जल योजनाओं के कनेक्शन फिलहाल नहीं काटे जाए। अब चुनौती बंद योजनाओं को चालू करने, खराब हैंडपंपों की मरम्मत और वैकल्पिक स्रोतों को तैयार रखने की है।