
आशीष शुक्ला, नईदुनिया, डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिडौरी जिले के जंगलों में बेशकीमती साल के पेड़ों पर बोरर कीट का हमला हुआ है। वर्ष 1999 के बाद पहली बार ऐसा है, जब व्यापक रूप से पेड़ों को क्षति पहुंची है। केंद्र सरकार ने कीट के प्रकोप से प्रभावित एक लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ों की कटाई को मंजूरी दे दी है।
वन विभाग के मुताबिक प्रभावित पेड़ सूख चुके हैं। यदि इन्हें समय रहते जंगल से नहीं हटाया गया तो कीट का प्रकोप दूसरे स्वस्थ साल के पेड़ों तक फैल सकता है, जिससे जंगल को और बड़ा नुकसान हो सकता है।
इससे पहले 1999 में भी बोरर कीट का बड़ा प्रकोप देखा गया था। तब 15 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करानी पड़ी थी। साल के पेड़ों को बचाने के लिए ही कीटों को मरवाने की इस वर्ष वन विभाग ने पहल की थी। ग्रामीणों की मदद से मारे गए 19 लाख 25 हजार से अधिक कीटों को वन विभाग 24 सितंबर को जलाएगा।
कटाई शुरू करने से पहले 16 सितंबर को कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में डीएफओ, एसडीओ, रेंजर और डिप्टी रेंजर समेत पूरे वन अमले को विज्ञानिक ढ़ंग से कटाई की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसमें सुरक्षा मानकों, लकड़ी के परिवहन, भंडारण और नीलामी की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया जाएगा।
एक अक्टूबर से प्रभावित पेड़ों की कटाई विधिवत रूप से शुरू होगी। अमरकंटक और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे हुए तीन वन परिक्षेत्रों में बोरर कीट से सबसे अधिक नुकसान देखा गया है।
बोरर कीट साल के पेड़ का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह कीट पेड़ के तने में छेद कर अंदर घुस जाता है और उसे भीतर से खोखला कर देता है। कीट तने के अंदर अंडे देता है। वन विभाग के अनुसार जलवायु परिवर्तन, लंबे समय तक सूखा और जंगल में नमी की कमी के कारण इस कीट का प्रकोप बढ़ा है।
बोरर कीट से प्रभावित एक लाख 46 हजार 784 पेड़ चिह्नित किए गए हैं। जिन्हें काटने की अनुमति केंद्र सरकार से मिल गई है। जितने पेड़ कटेंगे उससे अधिक पेड़ लगाने की पहल वन विभाग द्वारा की जाएगी।
- भारती ठाकरे, डीएफओ-उत्पादन डिंडौरी।
यह भी पढ़ें- एमपी में स्वाइन फ्लू का प्रकोप... इस वर्ष 400 से अधिक मरीज पॉजिटिव और 4 की मौत, इंदौर व भोपाल सबसे प्रभावित