
नईदुनिया प्रतिनिधि डिंडौरी। वेशकीमती साल प्रजाति पेड़ों के सबसे बड़े दुश्मन माने जाने वाले साल बोरर कीटों की आज गुरुवार को होली जलाई जाएगी। पश्चिम और पूर्व करंजिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत आठ केंद्रों में कुल 19 लाख 25 हजार 118 कीट चार डीएफओ की मौजूदगी में जलाए जाएंगे।
वन विभाग के एसडीओ सुरेंद्र जाटव ने बताया कि आठ केंद्र में कीट जलाने के लिए लकडी की चिता तैयारी होगी, जिसमें करंजिया, जगतपुर, कबीर, चौरादादर, खारीडीह, ठाडपथरा, कन्हारी का नाम शामिल हैं जहां कीटों को नष्ट करने की विशेष पहल आज होगी।
मंडला जिले से यहां दो डीएफओ आएंगे, वहीं जिले में पदस्थ दो ट्रेनी आईएफएस अधिकारी भी सत्यापन के लिए तैनात किए गए हैं। बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया की वीडियाग्राफी भी वन विभाग द्वारा कराई जाएगी। 27 वर्ष बाद वन विभाग विभाग फिर से इस तरह कीटों को नष्ट करने की पहल कर रहा है।
जिले में ही एक लाख 46 हजार 784 पेड़ साल बोरर की चपेट में आकर कटने के लिए हो चिन्हित किये गये थे, जिन्हें काटने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
विभाग ने इन कीटों को पूरी तरह नष्ट करने की तैयारी पूरी कर ली है। आज 24 सितंबर को सभी संग्रहण केंद्रों में कीटों को निर्धारित स्थान पर लाया जाएगा और विधिवत रूप से जलाया जाएगा। कीटों को जलाने के लिए लकड़ियों का प्रबंध भी किया गया है।
विभाग का दावा है कि इस सामूहिक अभियान से साल बोरर कीट को नष्ट कर साल के जंगलों को सूखने से बचाया जा सकेगा। साल बोरर कीट साल के पेड़ के तने में छेद कर अंदर घुस जाता है और उसे भीतर से खोखला कर देता है, जिससे कुछ ही दिनों में हरा-भरा पेड़ सूख जाता है। पिछले कुछ वर्षों में एक बार फिर डिंडौरी और मंडला वन वृत्त में इस कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ा था, जिससे लाखो साल के पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच गए थे।
कीटों के नष्टीकरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के लिए 24 सितंबर को होने वाले नष्टीकरण कार्यक्रम में डिंडौरी सहित मंडला जिले के दो अन्य डीएफओ की मौजूदगी रहेगी। एसडीओ, रेंजर और वन समितियों के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। जिन पेडों को कटाई के लिए चिन्हित किया गया है वहां बारिश थमने के बाद कटाई में तेजी आने की संभावना है।
जिले के तीन वन परिक्षेत्रों के जंगल साल बोरर कीट से अधिक प्रभावित हुए हैं। कुल चार डीएफओ की मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता के साथ सभी कीटों का सत्यापन करने के बाद उन्हें जलाया जाएगा। प्रति कीट पकड़ने के लिए ग्रामीणों को दो रुपये का भुगतान हुआ था।
अशोक सोलंकी, वन मंडल अधिकारी सामान्य डिंडौरी।
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