
नईदुनिया प्रतिनिधि,डिंडौरी। न्यायालय में वर्षों तक लड़ने के बाद भी जो बात नहीं बन सकी, वो नेशनल लोक अदालत में एक दिन में सुलह में बदल गई। शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में करीब चार साल पुराने पारिवारिक विवाद का ऐसा समाधान निकला, जिसकी पूरे न्यायालय परिसर में चर्चा हो रही है।
मामला इमलई गांव का है। यहां निवासी सुनील कुमार का पहला विवाह लगभग 20 वर्ष पूर्व हुआ था। शादी के कुछ वर्षों बाद पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद और विवाद बढ़ गया, जिसके चलते दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसी दौरान सुनील कुमार ने दूसरा विवाह कर लिया।
अपने अधिकारों और भरण-पोषण को लेकर पहली पत्नी ने कुटुंब न्यायालय डिंडौरी में प्रकरण दायर कर दिया। तब से यह मामला लगातार न्यायालय में चल रहा था। करीब चार साल तक दोनों पक्षों के बीच कानूनी लड़ाई चलती रही, लेकिन कोई हल नहीं निकल पा रहा था।
शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में इस प्रकरण को रखा गया। कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश एमएल राठौर की अध्यक्षता में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर समझाइश दी गई। इस दौरान अधिवक्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को आपसी सहमति के लिए प्रेरित किया।
न्यायाधीश की समझाइश और अधिवक्ताओं के प्रयासों का असर हुआ और दोनों पक्षों के बीच वर्षों से चला आ रहा गतिरोध टूट गया। आखिरकार सुनील कुमार और उसकी दोनों पत्नियों के बीच सुलह हो गई। समझौते के अनुसार सुनील कुमार ने यह स्वीकार किया कि वह अपनी दोनों पत्नियों और बच्चों की परवरिश और सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा और परिवार को साथ लेकर चलेगा।
इस सहमति के बाद चार साल से चल रहा मुकदमा आपसी राजीनामे से समाप्त हो गया।लंबे समय से चली आ रही कड़वाहट अब सुलह में बदल गई है। परिवार ने भी इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है और अब नई शुरुआत करने की बात कही है।
यह प्रकरण एक बार फिर साबित करता है कि लोक अदालत केवल मामलों के निपटारे का मंच नहीं, बल्कि परिवारों को टूटने से बचाने और आपसी संवाद से विवाद सुलझाने का सशक्त माध्यम है। जहां औपचारिक न्याय प्रक्रिया में सालों लग जाते हैं, वहीं लोक अदालत में आपसी समझ से वर्षों पुराने विवाद भी मिनटों में सुलझ जाते हैं।
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