
डिजिटल डेस्क, गुना। गुना पुलिस ने अपराधियों पर शिकंजा कसने और पारदी समुदाय से जुड़े शातिर चोरों को पकड़ने के लिए एक अनोखी डिजिटल पहल शुरू की है। इसके तहत 579 वारंटी बदमाशों का डिजिटल ब्योरा तैयार कर उनके ठिकानों को गूगल मैप पर दर्ज कर दिया गया है।
पुलिस टीमों ने पारदी बहुल चार प्रमुख गांवों (कनेरा चक, खेजरा चक, बीलाखेड़ी और कनेरी) में जाकर जीपीएस लोकेशन दर्ज की है। सटीक अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) मिलने से अब बाहरी पुलिस भी बिना भटके सीधे अपराधी के घर दबिश दे सकेगी।
'पारदी' शब्द मराठी भाषा के 'पारध' से बना है, जिसका मतलब शिकार करना होता है। ऐतिहासिक रूप से इस समुदाय के लोगों को शिकार करने, जड़ी-बूटियां इकट्ठा करने और वन्यजीवों की गहरी समझ के लिए जाना जाता है। पारदी (या पारधी) भारत की एक घुमंतू जनजाति है, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पाई जाती है।
इसके अलावा इनकी कुछ आबादी गुजरात और आंध्र प्रदेश के जंगलों में भी पाई जाती है। मुगलों और अंग्रेजों के समय इन्हें शाही रसोइयों या जमींदारों के लिए शिकार में मदद करने हेतु रखा जाता था। ब्रिटिश काल में बने 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' के कारण इस समुदाय को सामाजिक कलंक और उपेक्षा का सामना करना पड़ा था।
इससे स्थानीय मुखबिरों पर निर्भरता खत्म होगी और दबिश की सूचना लीक होने का खतरा भी समाप्त हो जाएगा। कागजी वारंट के बजाय अब पुलिस के पास 20-20 पन्नों का विस्तृत डिजिटल डोजियर, फोटो एल्बम और पूरा पारिवारिक बैकग्राउंड मौजूद है।
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कार्रवाई के साथ-साथ गुना पुलिस सामाजिक बदलाव की पहल भी कर रही है। ‘नई दिशा’ अभियान के माध्यम से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जीने के इच्छुक युवाओं और परिवारों को चिह्नित किया जा रहा है। ऐसे लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनके बच्चों को शिक्षा मुहैया कराकर समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है।