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गुना हवाला कांड: 4 पुलिसकर्मियों पर आरोप तय, तत्कालीन SP की भूमिका संदिग्ध, उच्च स्तरीय जांच शुरू

मामले में विभागीय जांच पूरी हो गई। चार निलंबित पुलिस कर्मियों पर आरोप तय हुए हैं। साथ ही तत्कालीन गुना एसपी अंकित सोनी की भूमिका भी संदिग्ध मिली है।

By Dhruv KumarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 21 Apr 2026 07:53:55 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Apr 2026 07:53:55 PM (IST)
गुना हवाला कांड: 4 पुलिसकर्मियों पर आरोप तय, तत्कालीन SP की भूमिका संदिग्ध, उच्च स्तरीय जांच शुरू
ग्वालियर आईजी ने खोली लापरवाही की परतें।

HighLights

  1. 20 लाख की रिश्वत और 1 करोड़ का हवाला
  2. रुठियाई चौकी पुलिस के खिलाफ चार्जशीट जारी
  3. ग्वालियर आईजी ने खोली लापरवाही की परतें

नईदुनिया प्रतिनिधि, गुना। गुना के धरनावदा थाना की रुठियाई पुलिस चौकी क्षेत्र में सूरत (गुजरात) के जीरा व्यापारी की गाड़ी में हवाला की रकम पकड़े जाने और उसे रिश्वत लेकर छोड़ने के मामले में विभागीय जांच पूरी हो गई। चार निलंबित पुलिस कर्मियों पर आरोप तय हुए हैं। साथ ही तत्कालीन गुना एसपी अंकित सोनी की भूमिका भी संदिग्ध मिली है, उनके खिलाफ उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है। आरोप है कि पुलिस अधीक्षक को इस रिश्वतकांड की सूचना पहले मिल गई थी, इसके बावजूद वे चुप बैठे रहे।

19 मार्च की रात का घटनाक्रम और रिश्वत का लेनदेन

दरअसल, 19 मार्च की रात राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर वाहन चेकिंग के दौरान रुठियाई चौकी पुलिस ने सूरत के जीरा व्यापारी की गाड़ी से एक करोड़ रुपये पकड़े थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने 20 लाख रुपए की रिश्वत लेकर गाड़ी और व्यापारी को छोड़ दिया था। 20 मार्च को सूरत के आइपीएस अधिकारी ने पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने पैसा लौटा दिया।


तत्काल निलंबन और मुख्यमंत्री की कार्रवाई

उसी रात ग्वालियर डीआइजी अमित सांघी रुठियाई पहुंचे और धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे, चौकी प्रभारी साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिकरवार, आरक्षक सुंदर रमन को निलंबित कर दिया गया था। बाद में मुख्यमंत्री ने गुना एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया।

जांच रिपोर्ट और पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र

इधर, ग्वालियर आइजी अरविंद सक्सेना ने मामले की जांच करैरा एसडीओपी आयुष जाखड़ को सौंपी थी। जाखड़ ने रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका नियमों के विपरीत बताई है। हालांकि, इस बात का जवाब नहीं है कि पुलिस कर्मियों ने कितने रुपये पकड़े और कितनी रिश्वत लेकर उसे छोड़ा। रिपोर्ट के आधार पर चारों निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिए गए हैं।

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ग्वालियर रेंज आइजी अरविंद सक्सेना से सीधी बात

  • सवाल: धरनावदा थाना पुलिस की कथित डील मामले की जांच रिपोर्ट में क्या मिला।
  • जवाब: चारों निलंबित पुलिसकर्मियों का संदिग्ध आचरण सामने आया है, उनके खिलाफ आरोप पत्र तय किए गए हैं।
  • सवाल: गाड़ी में कितनी राशि थी?
  • जवाब: वाहन में राशि मिलने की अलग-अलग जानकारी मिली है। मीडिया से गाड़ी में एक करोड़ की राशि होना, तो व्यापारी की ओर से 8.50 लाख रुपये, तो अन्य लोगों से 9.50 लाख रुपये होना बताया है।
  • सवाल: गाड़ी छोड़ने के बदले कितने का लेनदेन हुआ था?
  • जवाब: यही तो संदिग्ध आचरण था पुलिसकर्मियों का। गाड़ी पकड़ी, थाने लाए, पूछताछ की। लेकिन लिखा-पढ़ी नहीं की गई। रोजनामचा में भी घटना दर्ज नहीं है। लेनदेन को लेकर अभी कुछ स्पष्ट नहीं है।
  • सवाल: गाड़ी में रुपये और डील की जानकारी नहीं मिली, तो आगे क्या कार्रवाई होगी।
  • जवाब: निलंबित पुलिसकर्मियों पर आरोप पत्र तय होने के साथ ही विभागीय जांच होगी। इसमें भी कई परतें खुलेंगी।
  • सवाल: उक्त मामले में हटाए गए पुलिस अधीक्षक की भूमिका क्या रही।
  • जवाब: एसपी के संज्ञान में मामला 20 मार्च को ही आ गया था। वरिष्ठ अधिकारियों को बताते, तो उसी दिन कार्रवाई हो जाती। उनसे पर्यवेक्षण में लापरवाही तो हुई है। फिलहाल जांच चल रही है।