
अमित मिश्रा, नईदुनिया, ग्वालियर। साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए 5300 म्यूल खाते चिह्नित किए गए हैं। ये सभी बैंक खाते मध्य प्रदेश के हैं। राज्य साइबर सेल ने संदिग्ध लेनदेन के बाद इनकी पहचान ऑपरेशन मैट्रिक्स के अंतर्गत केंद्रीय गृह मंत्रालय के आई-फोर-सी (इंडियन साइबर क्राइम को-आर्डिनेशन सेंटर) की मदद से की है। अब इनकी जांच की जा रही है। ये बैंक खाते फर्स्ट लेयर के हैं, जिनमें ठगी की रकम सीधे पहुंची। दूसरी और तीसरी लेयर के म्यूल खातों की भी जांच की जाएगी।
मध्य प्रदेश में पहली बार ऐसा ऑपरेशन चलाया गया है, जब सीधे बैंक खातों को टारगेट किया जा रहा है। राज्य साइबर सेल के मुताबिक, म्यूल खाता धारकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), आइटी एक्ट 66-सी, 66-डी के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद इन्हें जेल भेजा जाएगा।
ग्वालियर पुलिस ने पिछले 15 दिन में म्यूल खातों का नेटवर्क चलाने वाले दो गैंग पकड़े हैं, जिन्होंने तीन हजार से अधिक बैंक खाते किराये पर उपलब्ध करवाये, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई। आरोपितों ने इसके लिए आर्थिक रूप से कमजोर, मजदूर, ग्रामीण, बेरोजगार युवा और इंटरनेट मीडिया पर पार्टटाइम जाब की तलाश करने वालों को निशाना बनाया। करीब 95 प्रतिशत बैंक खाते निजी बैंकों के हैं। इसमें बैंककर्मी की संलिप्तता भी सामने आई है।
राज्य साइबर सेल की पड़ताल में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क टेलीग्राम एप के जरिये संचालित हो रहा है। टेलीग्राम एप से ही विदेश में बैठे ठग गैंग के सरगना तक म्यूल खातों की जानकारी पहुंचाई जाती है और ठगी का रुपया इन्हीं म्यूल खातों में ट्रांसफर कर यूएसडीटी से क्रिप्टो ट्रेडिंग की जाती है। फिर ठगी का पैसा चीन, कंबोडिया, दुबई सहित अन्य देशों में पहुंच जाता है।
म्यूल खातों पर नकेल कसने के लिए प्रदेशभर में ऑपरेशन मैट्रिक्स शुरू किया गया है। राज्य साइबर सेल ने ग्वालियर में 377 म्यूल खाते चिह्नित किए हैं, जिनकी पड़ताल जारी है। इसके बाद एफआईआर दर्ज कर आरोपितों को जेल भेजा जाएगा। -संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, राज्य साइबर सेल