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एमपी में वेस्ट टू एनर्जी की दिशा में कृषि विवि की पहल, किचन वेस्ट और गोबर से बनेगी बायोगैस, हॉस्टल की रसोइयों में होगा उपयोग

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने जैविक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में पहल करते हुए वेस्ट टू एनर्जी मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 08:12:32 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 08:12:31 PM (IST)
एमपी में वेस्ट टू एनर्जी की दिशा में कृषि विवि की पहल, किचन वेस्ट और गोबर से बनेगी बायोगैस, हॉस्टल की रसोइयों में होगा उपयोग
जैविक कचरे व गोबर से तैयार होगी नेचुरल गैस। (AI Generated Image)

HighLights

  1. पर्यावरण संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट का नया मॉडल
  2. राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि का नवाचार
  3. हॉस्टल की रसोई में पहुंचेगी गीले कचरे से बनी बायोगैस

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। घरों से निकलने वाला कचरा अब सिर्फ डस्टबिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यही कचरा स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा स्रोत बनेगा। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने जैविक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में पहल करते हुए वेस्ट टू एनर्जी मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना के तहत किचन वेस्ट और गोबर से बायोगैस तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग रसोई गैस के रूप में किया जाएगा।

गैस को सीधे छात्रावास की रसोई तक पहुंचाया जाएगा

विश्वविद्यालय यह परियोजना सावित्री रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से शुरू कर रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर स्थित कृषि महाविद्यालय परिसर में प्लांट स्थापना के साथ हो चुकी है। यहां उत्पादित गैस को सीधे छात्रावास की रसोई तक पहुंचाया जाएगा। इंदौर में सफलता मिलने के बाद ग्वालियर स्थित कृषि विश्वविद्यालय परिसर में भी इसी प्रकार का प्लांट स्थापित किया जाएगा।


रसोई का गीला कचरा बनेगा ऊर्जा का स्रोत

इस प्लांट में घरों से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग किया जाएगा। भोजन के अवशेष, सब्जियों और फलों के छिलके सहित अन्य गीले कचरे को वैज्ञानिक प्रक्रिया से बायोगैस में बदला जाएगा।

गैस उत्पादन में गोबर का भी उपयोग होगा, जिससे ऊर्जा के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी तैयार होगी। इससे कचरे के निस्तारण की समस्या कम होगी और जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।

सफल रहा मॉडल तो शहरों में भी होगा विस्तार

विश्वविद्यालय का मानना है कि यह मॉडल केवल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। यदि परियोजना सफल रहती है तो बड़े आवासीय परिसरों, होटल, छात्रावास, कैंटीन और अन्य संस्थानों में भी किचन वेस्ट से गैस उत्पादन की व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। इससे नगर निकायों पर कचरा प्रबंधन का बोझ कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प भी तैयार होंगे।

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शोध और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना से छात्रों और शोधार्थियों को वेस्ट मैनेजमेंट एवं अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में व्यावहारिक अध्ययन का अवसर मिलेगा। साथ ही जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होने से प्रदूषण में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल कृषि शिक्षा और अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रभावी पहल करना है। वेस्ट टू एनर्जी माडल से जैविक कचरे का विज्ञानी उपयोग होगा, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और छात्रों को आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला, कुलगुरु, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय