
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। डीमैट खाता खोलने के नाम पर 20 हजार रुपये की साइबर ठगी के चर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश (सायबर क्राइम्स) ग्वालियर विवेक कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा आरोप संदेह से परे सिद्ध न कर पाने के आधार पर सभी पांच आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने पुलिस जांच को गंभीर रूप से दोषपूर्ण मानते हुए विवेचक को कारण बताओ नोटिस जारी करने और पुलिस अधीक्षक साइबर सेल को पत्र लिखने के निर्देश दिए हैं। यह मामला पुलिस थाना साइबर व उच्च तकनीकी अपराध थाना भोपाल, जोन ग्वालियर से संबंधित है।
अभियोजन के अनुसार, ग्वालियर निवासी आदित्य नारायण सक्सैना ने 27 अगस्त 2020 को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर खुद को मोतिलाल ओसवाल सिक्योरिटीज कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए डीमैट खाता खोलने का झांसा दिया। इसी बहाने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये एसबीआई बैंक खाते क्रमांक 38219642418 में जमा कराए गए।
राशि जमा होने के बाद शिकायतकर्ता को एक फर्जी डीमैट अकाउंट नंबर भेजा गया और बाद में 15 हजार रुपये और जमा करने का दबाव बनाया गया। संदेह होने पर शिकायतकर्ता ने बैंक खाते की जांच कराई, तब उसे धोखाधड़ी का पता चला।
कोर्ट ने अपने फैसले में विशेष रूप से उल्लेख किया कि जिन मोबाइल नंबरों से फ्राड कॉल किए जाने का दावा किया गया, उनमें से एक नंबर चंद्रभान यादव नामक व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन उसके विरुद्ध कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं की गई। न्यायालय ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों के विरुद्ध कोई ठोस सबूत नहीं था, उन्हें केवल धारा 27 साक्ष्य अधिनियम के मेमो के आधार पर वर्षों तक मुकदमे का सामना करना पड़ा। न्यायालय ने विवेचना को दूषित करार देते हुए विवेचक को कारण बताओ नोटिस जारी करने और पुलिस अधीक्षक साइबर सेल को सूचित करने के निर्देश दिए।