
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में जाली दस्तावेजों के जरिये संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने के मामले में पकड़ा गया भोपाल का नसीम अख्तर नए खुलासे कर रहा है।
एसआईटी की पूछताछ में उसने बताया है कि भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र में कार्यरत रहा एक कर्मचारी उसकी मदद करता था।
पासपोर्ट आवेदन के बाद आगे की प्रक्रिया में वह उसका साथ देता था। इसके एवज में रुपये लेता था। वह कर्मचारी अभी कहीं और कार्यरत है। अब एसटीएफ के निशाने पर वह कर्मचारी आ गया है।
जाली दस्तावेजों के जरिये 70 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनाने के मामले में इस नेटवर्क के मुखिया रियाल चौधरी से पूछताछ में भोपाल में टूर एवं ट्रेवल एजेंसी संचालित कर चुके नसीम अख्तर का नाम सामने आया।
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STF ने आरोपी को किया कोर्ट में पेश
इसके बाद वह पासपोर्ट बनवाने का काम करने लगा। उसके जरिये रियाल चौधरी ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट भोपाल से बनवाए थे। नसीम को एसटीएफ ने कोर्ट में पेश कर दो दिन की रिमांड पर लिया है। उससे पूछताछ जारी है।
नसीम ने बताया कि जिन संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाए गए, उनसे रियाल चौधरी 30 हजार रुपये लेता था। 20 हजार रुपये उसे मिलते थे। इसमें से वह पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी को भी पैसा देता था।
गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़े तार
वहीं, इस तरह से जाली दस्तावेजों के पासपोर्ट बनाने के मामले में अब दूसरे राज्यों से भी तार जुड़ने लगे हैं। महाराष्ट्र के पते पर तो पासपोर्ट बनने का खुलासा हो गया है। इससे पहले गुजरात के कच्छ के पते पर पासपोर्ट बनने का खुलासा हुआ था।