Basant Ritu: प्रकृति में दिखने लगे बसंत के रंग, 26 जनवरी से मौसम में आ जाएगा बदलाव
Basant Ritu: फूल-पौधे और पेड़ों की खुशी इस ऋतु में दिल जीत लेती है। न तो अधिक ठंड का अहसास होता है और न गर्मीका। ...और पढ़ें
By anil tomarEdited By: anil tomar
Publish Date: Sat, 21 Jan 2023 01:48:55 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Jan 2023 01:48:55 PM (IST)

Basant Ritu: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। बसंत के रंग दिखने लगे हैं। ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित इस दिन का स्वागत करने के लिए खेत खलियान आतुर हैं। मद्धम-मद्धम हवा के झोकों से लहलहाते सरसों के पौधों में खिलते फूलों के लिए बसंत ऋतु का आगमन किसी त्योहार से कम नहीं होता। फूल-पौधे और पेड़ों की खुशी इस ऋतु में दिल जीत लेती है। न तो अधिक ठंड का अहसास होता है और न गर्मी का। कदम-कदम पर आंखों के सामने तितलियों के झुंड ही झुंड नजर आते हैं।
दिन और रात, दोनों ही बहुत सुहावने और ठंडे होते हैं। इस ऋतु स्वागत का शहर के सामाजिक संगठन भी अलग-अलग अंदाज में करते हैं। विशेष बात तो यह है बसंत ऋतु के महत्व से युवा वर्ग भी परिचित है। बातों ही बातों में बताता है इस मौसम में ठंड की वजह से नीचे जाता तापमान में ठहर जाता है। हरे-भरे पेड़ और फूलों के कारण चारों तरफ हरियाली और रंगीन दिखाई देता है। लेखक निधि अग्रवाल लिखती हैं- पतझड़ को नव जीवन मिला। प्रकृति के मुरझाये अधरों पर, मुस्कानों जैसा का फूल खिला। लो आ गया बसंत। इस बार हम सभी 26 जनवरी को बसंत पंचमी मनाएंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पचंमी का पर्व मनाया जाता है। आज के आलेख में पढ़ें बसंत के रंग।
बसंत का पौराणिक महत्व भी है
पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत को कामदेव का पुत्र कहा गया है। ग्रंथों में मिले उल्लेख के अनुसार रूप व सौंदर्य के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार पाते ही प्रकृति झूम उठती है, पेड़ उसके लिए नव पल्लव का पालना डालते है, फूल वस्त्र पहनाते हैं, पवन झुलाती है और कोयल उसे गीत सुनाकर बहलाती है। भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है ऋतुओं में मैं बसंत हूं। इस ऋतु में बसंत पंचमी, शिवरात्रि और होली मनाई जाती है। भारतीय संगीत साहित्य और कला में इस ऋतु का महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत का एक राग तो बसंत को भी समर्पित है।