
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल संभाग के 130 नर्सिंग कालेजों पर सीबीआई जांच की तलवार लटकने से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता में फंस गया है। इन कालेजों के विद्यार्थियों की परीक्षा का रास्ता सीबीआई जांच से होकर गुजर रहा है। बिना जांच के कालेजों को मान्यता व परीक्षा कराने की अनुमति मिलने की संभावना नहीं है।
सबसे बड़ी पेचीदगी यह है कि जांच के दायरे में ऐसे कालेज भी हैं, जिनके पास अस्पताल की सुविधा मौजूद है, लेकिन वर्ष 2021-22 में गठित समिति की जांच के दौरान उनकी फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं हो सकी थी।
नर्सिंग कालेजों की मान्यता और परीक्षा से जुड़ा मामला लंबे समय से न्यायालय में चल रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कालेज प्रबंधन और विद्यार्थियों के सामने नई स्थिति खड़ी हो गई है। कालेज प्रबंधन को सीबीआइ जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा, तभी विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर आगे रास्ता खुल सकता है। दरअसल वर्ष 2021-22 में नर्सिंग कालेजों की स्थिति की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की गई थी।
समिति ने कॉलेजों की कई व्यवस्थाओं का परीक्षण किया, लेकिन फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं होने का बिंदु बाद में पूरे मामले की सबसे बड़ी अड़चन बन गया। इसी आधार पर 130 कालेजों को बिना सीबीआई जांच के राहत नहीं मिल सकी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। कालेजों की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परीक्षा की अनुमति भी अटक रही है।
130 कालेजों में ऐसे संस्थान भी शामिल हैं, जिनके पास अस्पताल उपलब्ध हैं। कालेज प्रबंधन का तर्क है कि उनके पास आवश्यक संसाधन और अस्पताल की व्यवस्था है, लेकिन वर्ष 2021-22 की प्रक्रिया में फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं होने के कारण वे भी मौजूदा जांच के दायरे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। यही वजह है कि कालेज प्रबंधन अब न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं।
इधर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की मान्यता के लिए ग्वालियर के 38 नर्सिंग संस्थानों की जांच पूरी हो चुकी है। इन संस्थानों को मान्यता देने के लिए मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल में स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है। नई मान्यता प्रक्रिया एक तरफ आगे बढ़ रही है, वहीं 130 कालेजों की जांच और परीक्षा का मामला अभी भी न्यायालयीन निर्देशों के बीच उलझा हुआ है।
नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी चिंता परीक्षा और आगे की पढ़ाई है। जांच प्रक्रिया लंबी खिंचने की स्थिति में विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने के साथ आगे की पढ़ाई और रोजगार की योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। अब विद्यार्थियों की नजर इस बात पर है कि संबंधित कालेज सीबीआई जांच को लेकर क्या निर्णय लेते हैं और न्यायालय से स्थिति कब स्पष्ट होती है। यानी कॉलेजों की मान्यता का विवाद अब सीधे विद्यार्थियों की परीक्षा और भविष्य से जुड़ गया है।
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वर्ष 2021-22 में जिन कालेजों ने सीबीआइ जांच कराने से इनकार किया था वह कालेज जांच के दायरे में आए हैं। वहीं ग्वालियर के जिन 38 कालेजों की जांच कराई गई थी उनकी वर्ष 2026-27 की मान्यता के लिए स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है।- बीनू कुशवाह, डायरेक्टर, नर्सेस एण्ड पैरामेडिकल काउंसिल
सुप्रीम कोर्ट का सीबीआइ जांच कराने का आदेश स्वागत योग्य है। इससे नर्सिंग कालेज की मान्यता में पारदर्शिता रहेगी। हालांकि तब तक छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।- विष्णु पाण्डेय, प्रदेश अध्यक्ष, नर्सिंग छात्र संगठन, मध्यप्रदेश